आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनवाने में जिले के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में कोई विशेष रुचि नहीं

फरीदाबाद : आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनवाने में शहरी क्षेत्र के लोगों में विशेष रुचि नहीं है। शहरी क्षेत्र में लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग माइक्रो लेवल पर कार्य करेगा। इसमें निगम पार्षदों की मदद ली जाएगी। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने नगर निगम आयुक्त को पत्र भी लिखा है और पार्षदों के साथ बैठक करवाने के लिए निवेदन किया है। जिले में 81 हजार गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं, जबकि 1.34 लाख परिवारों में 5.42 लाख लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं।

बैठक में पार्षदों से प्रधानमंत्री महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत में सहयोग की अपील की जाएगी। विभाग के अनुसार एक पार्षद की अपने क्षेत्र में पकड़ मजबूत होती है और वह लगभग सभी को जानते भी हैं और वह निर्धारित लाभपात्र को गोल्डन कार्ड के लिए ट्रेस करने में काफी मदद कर सकते हैं। आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं के पास लाभार्थियों की सूची है, लेकिन वह ट्रेस नहीं हो पा रहे हैं। पार्षद उन्हें ट्रेस करने में मदद कर सकते हैं और लाभार्थी घर के नजदीक स्वास्थ्य केंद्र या फिर सीएससी पर जाकर कार्ड आसानी से बनवा सकते हैं। ट्रेस नहीं होने के चलते फरीदाबाद गोल्डन कार्ड बनाने में प्रदेश में सबसे पीछे चल रहा है। यह हैं प्रमुख कारण

आयुष्मान भारत योजना का लाभ वर्ष 2011 जनगणना के आधार पर दिया जा रहा है और फरीदाबाद एक औद्योगिक शहर है। यहां पर दूसरे राज्यों से आकर रहने वाले लोगों की संख्या अधिक है और वो बीपीएल कार्ड सहित अन्य पहचान पत्र बनवा लेते हैं। जनगणना के दौरान उन्हें आयुष्मान योजना के लाभार्थियों में शामिल कर लिया गया था, लेकिन वह जिले में नहीं हैं। लाभार्थियों के नहीं मिलने से कार्ड बनाने की गति धीमी है। यहां पर बन रहे हैं कार्ड

जिले में 228 कॉमन सर्विस सेंटर(सीएससी), नागरिक अस्पताल, दस पीएचसी और 13 यूपीएचसी सहित पैनल के 22 अस्पतालों में गोल्डन कार्ड बनाए बनाए जा रहे हैं। नगर निगम आयुक्त को पत्र लिख कर उनसे पार्षदों के साथ बैठक कराने का निवेदन किया गया है। इसके अलावा लोगों को गोल्डन कार्ड के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। मार्च तक गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

-डॉ. कृष्ण कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

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