बजट सत्र में मुख्यमंत्री मनोहर लाल और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की जमकर भिड़ंत हुई

हरियाणा विधानसभा का करीब एक पखवाड़े तक चला बजट सत्र काफी अहम रहा। बजट सत्र के दौरान कांग्रेस जहां पूरी तरह से एकजुट नजर आई, वहीं भाजपा, जजपा और निर्दलीय विधायक बिखराव के शिकार रहे। जनहित के मुद्दे उठाने से लेकर सियासी माहौल को गरम करने में कांग्रेस विधायक गठबंधन की सरकार पर पूरी तरह से हावी रहे। सदन में जहां भाजपा के पुराने आक्रामक चेहरों की कमी खली, वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ गृह मंत्री अनिल विज, विधायक असीम गोयल और महीपाल ढांडा ने जमकर मोर्चा संभाला। इसके बावजूद कांग्रेस विधायकों की एकजुटता ने भाजपा को नए सिरे से रणनीति बनाने के लिए मजबूर कर दिया।

 

विधानसभा का बजट सत्र 14 दिन चला, लेकिन इसमें कार्य अवधि नौ दिन की रही। बीच में पांच छुट्टियां रहीं। विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप के बीच वित्त मंत्री के नाते मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस बार जिस तरह का बजट पेश किया, उसकी हर जगह तारीफ हो रही है। हालांकि विपक्ष मनोहर लाल के इस बजट पर अंगुली उठा रहा है और बढ़ते कर्ज व राजस्व घाटे पर सरकार की घेराबंदी करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने दे रहा, लेकिन मुख्यमंत्री ने सांसदों और विधायकों से सुझाव लेकर जिस तरह उनके करीब 70 प्रतिशत सुझावों को बजट में शामिल करते हुए इसे आम आदमी का बजट बनाने की कोशिश की, उसकी हर जगह चर्चा है।

बजट सत्र में कई मौके ऐसे आए, जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की जमकर भिड़ंत हुई। कांग्रेस की ओर से किरण चौधरी, आफताब अहमद, बीबी बत्रा, डॉ. रघुबीर कादियान, बिशनलाल सैनी, गीता भुक्कल, अमित सिहाग, धर्म सिंह छौकर, नीरज शर्मा और राव चिरंजीव ने खुलकर सरकार की घेराबंदी की। हलोपा के एकमात्र विधायक गोपाल कांडा हालांकि सदन में रहे, लेकिन उनकी उपस्थिति कहीं दर्ज नहीं हो सकी। इनेलो की ओर से एकमात्र अभय सिंह चौटाला जिस तरह से पूरी सरकार पर भारी पड़े, उसे देखकर न केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस विधायकों ने भी अभय चौटाला की दिलेरी की जमकर तारीफ की।

अभय अड़े तो मनोहर लाल को संभालना पड़ा मोर्चा

अभय सिंह ने नशे समेत कई मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी की, जबकि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धान घोटाले पर सरकार से सवाल पूछे। कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने ब्राह्मणों को दान में दी गई जमीनें वापस लेने का मुद्दा उठाया। हरियाणा सरकार की ओर से डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने बड़े ही सधे अंदाज में विपक्ष के हर सवाल का जवाब दिया। विभिन्न मौकों पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक के बाद एक विपक्ष की हर आशंका का समाधान किया तो गृह मंत्री अनिल विज व परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने भी मोर्चा संभाला। हालांकि विज के इस बार तेवर पिछली बार की सरकार के तेवर से कम ही दिखाई दिए। इस बार पहली दफा सदन छह मिनट पंजाबी में चला।

बंटे नजर आए दुष्यंत चौटाला की पार्टी के विधायक, कुंडू की सुनवाई नहीं

सदन में भाजपा को समर्थन देने वाले जननायक जनता पार्टी के विधायक भी बंटे हुए नजर आए। टोहाना के विधायक देवेंद्र बबली को नशे के मुद्दे पर बोलने का मौका नहीं मिला तो नारनौंद के विधायक रामकुमार गौतम और गुहला चीका के विधायक ईश्वर सिंह ने कई मौकों पर अपनी ही सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए तो सीएम को बाद में सबूत मिलने पर जांच का भरोसा दिलाना पड़ा। शाहबाद के जजपा विधायक रामकरण काला को भी अपनी बात कहने का मौका नहीं मिला, जिस कारण वह नाराज दिखाई दिए।

निर्दलीय विधायकों का निराला अंदाज, स्पीकर चले सधी चाल

भाजपा विधायकों की ओर से असीम गोयल और महीपाल ढांडा ने मोर्चा संभाला तो निर्दलीय विधायकों में नयनपाल रावत सरकार के पाले में खड़े होकर विपक्ष के हमलों का जवाब देते नजर आए। दलितों के मुद्दे पर भाजपा की ओर से लक्षमण नापा और कांग्रेस की ओर से गीता भुक्कल ने मोर्चा संभाला। पूरे सदन को चलाने में स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने बड़े ही समन्वित तरीके से विधायकों को साधने में सफलता हासिल की है। सदन में इस बार करीब डेढ़ दर्जन बिल पास हुए हैं।

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