हरियाणा में पशुपालकों के लिए खुशखबरी

हरियाणा के मुख्यमंत्री  मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में बीमार पशुओं के उपचार के लिए पशुपालकों के घर-द्वार पर ही ईलाज के लिए पशु संजीवनी सेवा के नाम से मोबाईल डिस्पेंसरी शुरू की जाएगी और डेयरी फार्मिंग को एक बड़े व्यवसाय के रूप में स्थापित करने के लिए प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता की 1087 ग्राम की मात्रा को बढ़ाकर देश में पहला स्थान हासिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री आज करनाल में एनडीआरआई के मैदान में आयोजित 37वीं पशु प्रदर्शनी के दूसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि पशुपालकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित करके आज के कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने ऊंट की सवारी करके मेले में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने रैम्प शो करते हुए पशुओं का प्रदर्शन भी देखा और इसके लिए पशुपालकों को बधाई भी दी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हरियाणा कृषि प्रधान प्रदेश है। किसान का जुड़ाव कृषि व पशुपालन से है, बिना खेती पशुपालन नहीं हो सकता। इसलिए दोनों के संयुक्त कार्य से किसान की आय दोगुनी करने के लिए हरियाणा सरकार कृषि और पशुपालन को बढ़ावा दे रही है। इससे देश व प्रदेश उन्नत होगा। ब्राजील जैसा देश हमारी ही गायों की नस्लों में सुधार करके 70 से 80 किलो प्रतिदिन दूध प्राप्त कर रहे हैं, परंतु हम क्यों नहीं। इस उपलब्धता के लिए हर हरियाणावासी को दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास करने चाहिए ताकि दूध उत्पादन में हरियाणा का नाम विश्व प्रसिद्ध हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूध उत्पादन से आमदनी बढ़ाने के लिए प्रदेश में नए-नए संयंत्र लगाए जाएंगे। इनमें दूध को कईं दिनों तक संरक्षित रखने के लिए टैट्रा पैक का प्रोजैक्ट होगा। कोई भी व्यक्ति जरूरत पडऩे पर पैकिंग में उपलब्ध दूध को खरीद सकेगा। इसी प्रकार दूध को ठंडा रखने के लिए बड़े-बड़े मिल्क कूलर लगाए जाएंगे। हिसार में इंडो-इजराईल सहयोग से एक अन्य संयंत्र लगाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में खेती के साथ-साथ दुधारू पशुओं के पालने की परंपरा प्राचीनकाल से है और हमारी अर्थव्यव्था में इसकी विशिष्ट पहचान है। देश में गौवंश की सेवा और पूजा भी की जाती है। इसलिए सरकार पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए डेयरी विकास और पशुपालकों को प्रोत्साहित करने पर बल दे रही है। अब प्रदेश में ब्राजील से लाई गई पशु गर्भाधान की नई तकनीक सैक्स सोर्टिड सीमन से 80 से 90 प्रतिशत बछडिय़ा पैदा होंगी। प्रदेश में इसका सफल प्रयोग किया जा चुका है। इस सीमन की कीमत पहले प्रदेश में 800 रुपये प्रति गर्भाधान थी, अब पशुपालकों के हित को देखते हुए इसकी कीमत 200 रुपये रखी गई है जो देश में सबसे कम है। इससे आने वाले समय में अच्छी नस्ल अधिक बछडिय़ों से दूध का उत्पादन बढ़ेगा जिससे किसान की आय बढऩी संभव होगी।

उन्होंने कहा कि दूध की गुणवत्ता और विशेषकर गाय के दूध को एक प्राकृतिक औषधि बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय के दूध में एट-टू तत्व होता है, उसके सेवन से व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी नहीं होती और मस्तिष्क भी स्वस्थ रहता है। गाय के दूध में प्रोटीन ज्यादा होता है। वर्षों पहले ग्रामीण क्षेत्रों में दूध दही का अधिक प्रयोग किया जाता था और बीमारियां भी नहीं होती थी।

उन्होंने कहा कि दो दिन पूर्व कुरुक्षेत्र गुरुकुल में प्राकृतिक खेती के प्रयोग को लेकर एक कार्यशाला हुई थी जिसमें बताया गया था कि रसायनिक खादों की जगह गाय के गोबर व मूत्र के मिश्रण की खाद खेतों में डालने से प्राकृतिक खेती होती है। सरकार ने निर्णय लिया है कि जो किसान ऐसी खेती करेगा उसे प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का सपना भी साकार होगा। इसी प्रकार अच्छे दुधारू पशु रखने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहित करने की योजना पहले से ही लागू है। इसके तहत अच्छी दूध देने वाली मुर्रा भैंस को विभाग की ओर से 30 हजार रुपये तथा गाय को भी 20 हजार रुपये का ईनाम दिया जाता है। सहकारी दुग्ध समितियों को अलग से गाय व भैंस के दूध पर प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

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