पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने अपने आवास पर परिवार के साथ झंडा फहराकर मनाया पार्टी का स्थापना दिवस

भिवानी । सोमवार को बड़ी सादगी के साथ परिवार सहित अपने आवास पर झंड़ा फहराकर भाजपा के जन्म से ही पार्टी के निष्ठावान, ईमानदार व सच्चे सिपाही रहे पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने भाजपा का 40 वां स्थापना दिवस मनाया । इस दौरान उन्होंने पार्टी की स्थापना से लेकर अब तक के सफर की याद को ताजा करते हुए पत्रकारों से दूरभाष पर ही अपने विचार सांझा किए और अटल बिहारी वाजपेयी, डा. मंगल सैन,भैरोसिंह शेखावत, विजय राजमाता सिंधिया, सुन्दर सिंह भंडारी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित अन्य पुराने साथियों जो पार्टी की स्थापना के अवसर पर मुम्बई में उनके साथ थे को याद कर भावुक हो गए ।
प्रो. शर्मा ने पत्रकारों को बातचीत में बताया कि 6 अप्रैल 1980 को बांद्रा बम्बई के समता नगर में पार्टी की स्थापना हुई जिसके अटल बिहारी वाजपेयी को पार्टी का पहला राष्टï्रीय अध्यक्ष चुना गया था ।

 

उस समय बम्बई में वाजपेयी ने कहा था कि एक दिन देश से ‘अंधेरा छटेगा और कमल खिलेगाÓ । आज उनकी बाते प्रासंगिक है। यही कारण है कि आज केन्द्र व अधिकांश प्रदेशों में लोग भाजपा की जनहितेषी नीतियों में विश्वास जता रहे हैं । उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में किसी को शामिल नहीं किया गया है और उन्होंने इसे अकेले ही परिवार के साथ मनाने का निर्णय लिया । इस मौके पर उन्होंने भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि वे पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाए और एक सच्चे सिपाही के रुप में ईमानदारी से पार्टी के लिए कार्य करें आज कार्यकताओं के दम पर ही भाजपा विश्व की सबसे बडी पार्टी है।

 

रामबिलास शर्मा ने संघ में भी अहम जिम्मेदारियों को निभाया वर्ष 1971 में सोहन सिंह ने संघ की झंडेवालान शाखा में भी रामबिलास शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी, जिसमें वे अंग्रेजी दैनिक श्मातृभूमिश् के प्रमाण-पाठक के रूप में शामिल हुए। वर्ष 1971-73 से शाम की कक्षाओं में भाग लेकर अंग्रेजी में अपनी पोस्ट-ग्रेजुएशन की प?ाई की। भिवानी में किरोडीमल कॉलेज से बीएड की डिग्री हासिल की। 1974 में प्रसिद्ध जेपी मोमेंट में शामिल हुए थे। उनके समर्पण से प्रभावित होकर, स्व. डॉ. मंगल सेन ने उनसे कुरुक्षेत्र में एक प्रो. के रूप में अपनी नौकरी छो?ने का अनुरोध किया और उन्हें रोहतक ले आए जहां उन्हें आरएसएस के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया। इस घटना के साथ उन्होंने राजनीति क्षेत्र में प्रवेश किया और सक्रिय रूप से जुड़े रहे। एक असाधारण कार्यकर्ता होने के नाते वे कई आंदोलनों में शामिल हुए और कई आंदोलनों का नेतृत्व किया, जिसके कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा ।

 

हरियाणा में भाजपा को जिंदा रखने में प्रो. शर्मा के योगदान को भुलाया नही जा सकता पार्टी की स्थापना के बाद से ही प्रो. शर्मा को प्रदेश में पार्टी का नाम बनाए रखने में काफी संघर्षों से गुजरना पड़ा ।कभी हार न मानने वाले प्रो. शर्मा प्रदेश में कई बार पार्टी के अकेले विधायक रहे तथा प्रदेश में सरकार बनाने व हटाने में इनकी पूरी भूमिका रही । वर्ष 2013 से 2015 (पहले 1990-1993) में दूसरी बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चुने गए।

 

लगातार चार बार महेंद्रगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के चुने गए और अलग-अलग चरणों में जनस्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री के रूप में प्रदेश में काम किया । वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रदेश में उनके नेतृत्व में ही पार्टी द्वारा लडी गई 8 लोकसभा सीटों में से 7 सीटों पर जीत दर्ज की तथा प्रदेश में भी पहली बार इनके नेतृत्व में पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनी जिसमें प्रो. शर्मा ने कैबिनेट मंडी के रुप में शिक्षा और भाषाए्, परिवहन, तकनीकी शिक्षा, खाद्य और आपूर्ति, पर्यटन, नागरिक उड्डयन, संसदीय कार्य, पुरातत्व और संग्रहालय और सत्कार जैसे मंत्रालय लेकर सरकार में 2 नम्बर को मंत्री बनकर ही संतोष करना पडा और मुख्यमंत्री की दौड़ में पिछड़ गये। सरकार में मंत्री रहकर काम करते हुए अहम निर्णय से प्रदेश को विकास के मामले में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया । आज भी भाजपा में प्रो. शर्मा का नाम एक कदावर नेता के रुप में आता है ।

 

छोटे से गांव राठीवास में गरीब किसान के घर में जन्में प्रो. शर्मा रामबिलास शर्मा का जन्म 25 जुलाई 1950 को महेंद्रगढ़ के पास एक छोटे से गांव राठीवास में किसान परिवार से संबंध रखने वाले पंडित जयराम और गिंदोडी देवी के यहां हुआ था। 1967 में माधोगढ़ स्कूल से अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने राजकीय महाविद्यालय, महेंद्रगढ़ से स्नातक स्तर की प?ाई के लिए आर्ट्स स्ट्रीम को चुना। 1970 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए, 15 जून 1970 को बिमला देवी से शादी कर ली। शादी के कुछ दिन बाद ही वह संघ में मिली जिम्मेदारी को निभाने के लिए 29 जून 1970 को रोहतक चले गए और संघ के कार्यो में लग गये। अमरजेन्सी के दौरान श्री शर्मा को पुलिस ने गिर$फ्तार कर बिहार की गया जेल में डाल दिया गया।

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