रोहतक : अग्निवेश का रोहतक का 1967-1968 से ही नाता रहा है। 1968 में रोहतक के जाट भवन के निकट जबरदस्त आंदोलन हुआ था। छात्रों की मांगों को लेकर हुए इस आंदोलन में शिरकत करने पहुंचे स्वामी अग्निवेश ने उस दौरान दीक्षा नहीं थी और उस दौरान उनका नाम था प्रोफेसर श्यामराव। करीब 10 हजार छात्रों को संबोधित किया। इससे पहले चंडीगढ़ में छात्र और अध्यापकों के हकों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। रोहतक में छात्रों को भड़काने के आरोप लगे। इसलिए यहां करीब एक माह तक सेंट्रल जेल में रहे। आपातकाल के दौरान भी एक माह रोहतक की जेल और 13 माह अंबाला की जेल में रहे।

स्वामी अग्निवेश ने राजनीतिक जमीन सीधे तौर से कहें तो रोहतक से ही आंदोलनों के जरिए खड़ी की। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश लंबे समय से स्वामी अग्निवेश से जुड़े हुए हैं। स्वामी अग्निवेश ने साल 2006 में स्वामी आर्यवेश को दीक्षा दी थी। प्रधान आर्यवेश ने बताया है कि शराबबंदी के खिलाफ स्वामी जी ने 1992 में कुरुक्षेत्र से आंदोलन शुरू किया था। उस दौरान करीब 200 लोगों के साथ 15 दिनों की दिल्ली तक पद यात्रा निकाली थी। यह आंदोलन चलता रहा और साल 1996 में बंसी लाल सरकार ने शराबबंदी का फैसला लिया। सती प्रथा के खिलाफ भी आंदोलन चलाया। राजस्थान में इस अभियान का व्यापक असर देखने को मिला। आपात काल के दौरान सरकार की नीतियों के विरोध में एक दैनिक समाचार-पत्र राजधर्म भी निकाला। लेकिन सरकार ने प्रेस पर ताला जड़ दिया और कर्मचारी भी गिरफ्तार कर लिए।
आर्य सभा ने प्रदेश में लड़ा था चुनाव, यहीं ली दीक्षा
रोहतक के दयानंद मठ में स्वामी अग्निवेश ने सात अप्रैल 1970 में दीक्षा ली। तभी से इनका नाम प्रोफेसर श्यामराव से अग्निवेश पड़ा। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने बताया कि 1970 में आर्य सभा बनाई गई। 1972 का आर्य सभा के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया। उस दौरान रोहतक के महम से उम्मेद सिंह और पलवल से किशनलाल चुनाव जीते। बाद में जेपी आंदोलन से भी जुड़े। साल 1977 में आर्य समाज का जनता पार्टी में विलय हो गया।
स्वामी अग्निवेश ने जगाई थी प्रदेश में बेटी बचाओ अभियान की अलख
प्रदेश के लोगों में अब लिंगानुपात सुधार के प्रति काफी जागरुकता देखी जा रही है। जागरुकता की यह अलख स्वामी अग्निवेश ने बेटी बचाओ अभियान चलाकर जगाई थी। अभियान की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम आर्य व संयोजिका प्रवेश आर्य का कहना है कि स्वामी अग्निवेश दूरदर्शी सोच रखते थे। देश-प्रदेश में बेटी बचाने के लिए उन्होंने लोगों को पहले ही सचेत कर दिया था। इसी के चलते उन्होंने उन्होंने 2005 में टंकारा से अमृतसर तक जन जागरुकता यात्रा निकाली थी। यह जागरुकता यात्रा रोहतक से भी होकर गुजरी थी। उसी दौरान वे दोनों इस अभियान से जुड़ी थीं और प्रदेश में बेटी बचाओ अभियान की शुरुआत हुई। अभियान के तहत उन्होंने गांव-गांव और शहर-शहर में लोगों को जागरुक किया। इस अभियान के तहत लोगों को तभी से लगातार जागरुक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वामी अग्निवेश का निधन आर्य समाज सहित पूरे राष्ट्र के लिए अपूर्णीय क्षति है।
