देश में शराब की दुकान खोलने का निर्णय छलावा है भीड़ भगदड़ का माहौल दिखाकर सरकार अपने चीन से हुए सौदे जिसमे एक भारतीय मेडिकल कंपनी शमील थी एवम अन्य नाकामयाबीयों पर पर्दा डालना चाहती है और अपने विरोधियों को गोलबंद नहीं होने देना चाहती है आज देश समाज की जरूरत है कि घर घर में खाने का राशन पहुंचे, सबका समय से मेडिकल चेकअप हो करोना हेल्थ कैंप लगाया जाए सरकार ने जितना पैसा डॉक्टरों के ऊपर फूल छिड़कने में खर्च कर दिखावा एवम ध्यान भटकाने में किया है
अगर उन्ही पैसो से डॉक्टरों एवम करोना फाइटर की सुरक्षा सुविधाओं पर खर्च किया जाता तो वह उचित होता डॉक्टरों को अभी फूल की आवश्यकता नहीं है सुरक्षा किट की और इलाज के सुविधाओं की आवश्यकता है इसलिए सरकार कहीं ना कहीं खुद दिग्भर्मित एवं दिशाहीन है जिस के कारण से मरीज दिन प्रतिदिन बढ़ रहे है ओर कही न कही करोना फाइटर( डॉक्टर,नर्स,पुलिस सफाई कर्मी आदि) प्रभावित हो रहे है जो असल मे विचार करने लायक है सरकार की चूक है ना की शराब के ठेके खोले जाए.
भारत ऋषियों,बुद्धिजीवियो,विचारवानो का देश है शराबियों का भारत मत बनाएं जिसे पीना है वह अपने घर में बैठकर पी सकता है नंगा नाच करना कराना देश की बदनामी है आज के शराब के ठेकों पर उमड़ी भीड़ लाठी चार्ज की खबर से देश का नाम खराब हुआ है सरकार निश्चित करे कि शराब के ठेकों पर अगर भीड़ का तांडव न हो सके,इसके लिए कुशल नीति बनाए। शराब के ठेकों पर उमड़ी भीड़ ने साबित कर दिया है कि दिल्ली और देश में कोई गरीबी भुखमरी नहीं है जो जूठी खबर प्रसारित/दिखाने का प्रयास सरकार द्वारा किया जा रहा है सरकार शराबबंदी करें, सखती करें जरूरी हो तो शराब घरों तक वितरण कर लॉक डाउन के नियमों का पालन कराएं, सरकार शराब की बिक्री की आय से करोना महामारी एवं किसानों मजदूरों के ऊपर खर्च करें।
महंत कैलाशनाथ हठयोगी
