राम मंदिर निर्माण एवं देश में आपदा धनराशि मोदी केअर फण्ड का क्या हुआ? अखिल भारतीय संत एकता आंदोलन परिषद एवं गुरु गोरक्षनाथ मानव कल्याण संस्थान के परमाध्यक्ष महंत कैलाशनाथ हठयोगी ने यह बयान जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा सहायता राशि सीधी जिला के उपायुक्त डीसी डीएम को ना दे कर अन्य सामाजिक संस्थाओं संगठनों को दिया जाना अपने आप में एक बहुत बड़ा सवाल है जिले के सम्मानीय अधिकारियों पर भरोसा करने की आवश्यकता है जो की अपनी जिम्मेदारी इस संकट की घड़ी में बखूबी निभा रहे हैं सहायता राशि संगठनों को भेजने का अभिप्राय बंदरबांट कराने जैसा होगा पहले ही यह संगठन देश समाज में भरोसे को खो चुके हैं
1.राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन कितना आया? किसके पास है?कितना लगाया?
2. क्या राम मंदिर निर्माण के नाम पर एकत्रित धन मान्य चारों पीठों के शंकराचार्य एवं संत समाज को सौंपा गया?
3. देश में कोरोना महामारी के नाम पर एकत्रित धन कितना आया और कहां गया?
संत समाज जानना चाहता है जिसका हिसाब किताब आज तक किसी को नहीं मालूम और ना ही कोई देने योग्य है सरकार द्वारा दी जाने वाली धनराशि का लेखा-जोखा होना चाहिए जिसकी जवाबदेही उपायुक्त राज्य सरकार की होगी, इस काम से पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि जरूरतमंदों प्रवासी गरीब मजदूर किसान नौजवानो तक सहायता राशि समय अनुसार पहुंच जाए और जमीनी हकीकत से पर्दा हटे, कहावत अनुसार “अंधी बांटे रेवड़ी अपने अपने को दे” वाली कहावत लागू कर दी गई है जिसकी उम्मीद सन्त समाज, देश की जनता और प्रशासन केंद्र सरकार से नहीं करता है परमेश्वर के अधिक प्रिय कुछ लोग देश में हिंदू मुस्लिम का तनाव करवा कर राजनीतिक रोटियां सेकना चाहते हैं ऐसे तत्वों के कारण प्रधानमंत्री जी सहित संपूर्ण देश की विश्व में बदनामी हो रही है ऐसे विचारधारा रखने वाले संगठन शक्तियों एवं स्वार्थी तत्वों लोगों से सावधान रहना होगा तभी जा कर विश्वगुरु भारतम् का स्वप्न साकार हो सकेगा।
हमारा देश भारत ऋषि, कृषि, बुद्धिजीवियों, मनीषियों, तपस्वीयों का देश है आस्थावान श्रद्धा भक्ति भावना ईश्वर गुरु- गौ -गंगा साधु-संतों पीर फकीरों को मानने वाला देश है जब भी कोई दैवी आपदा आती है उस समय जनसाधारण अपने अपने आस्था अनुसार अपने धार्मिक स्थानों सद्गुरु के पास जाकर उससे मुक्ति का मार्ग ढूंढते हैं जिसके अनेक उदाहरण मिल जाएंगे वर्तमान समय में देवी आपदा आने पर मठ मंदिर पूजा स्थल सत्संग सब बंद कर दिए गए हैं हमारे धर्माचार्य जगद्गुरु शंकराचार्य संतों की उपेक्षा अनादर किया गया है दैवी आपदा के समय ईश्वर के शरणागत होने की बजाय हमारे प्रधान सेवक मानवता के शत्रु हथियार व्यापारी देशों के प्रमुखों से मंत्रणा एवं उनके स्वागत में लगे हुए हैं जबकि हमारी सरकार इस दैवी आपदा आर्थिक संकट के दौर से धर्म गुरुओं के शरणागत होने की बजाय शराब कारोबारी व्यापारियों से संपर्क स्थापित कर ठेके खुलवा देती है और मठ मन्दिर उपासना केंद्रों पर ताला लगवा देती है,
यह कैसा “राम राज्य” है?
साबरमती के लाल गांधी जी के शब्दों में “आत्मा की पवित्रता शांति का नाश करती है”शराब के व्यापारियों को संगठन विशेष का आशीर्वाद प्राप्त है इस दैवी आपदा में भी सरकार द्वारा सभी महत्वपूर्ण कार्यो की अनदेखी कर, दान से प्राप्त धन अनुदान के रुप मे तथा कथित संगठन विशेष के लोगों में वितरित करने के लिए दिया गया है जिसकी वजह से प्रवासी गरीब मजदूर किसान को अपने गाँव-घर तक जाने के लिए पदयात्रा का सहारा लेना पड़ा, जिसका लगाव अपने संगठन कारोबार व्यापार से है देश समाज आपसी भाईचारे से नहीं जो जगजाहिर है संगठन विशेष के क्रियाकलापों के कारण से देश की आर्थिक स्थिति दयनीय जर्जर हो गई है ऐसे संगठनों से “प्रधान सेवक को देश के सम्मान के खातिर ऐसे संगठनों से सदा के लिए रिश्ता तोड़ना होगा, देशवासियों से रिश्ता जोड़ना होगा”।
केंद्र सरकार द्वारा सामाजिक संगठनों को दी जाने वाला अनुदान राशि को तत्काल प्रभाव से रोक लगा देना चाहिए कारण कि उक्त सामाजिक संगठनों पर देशवासियों को भरोसा नहीं है केंद्र सरकार मान्य चारों पीठों के जगदगुरु शंकराचार्य, अखाड़ा परिषद विभिन्न पंत परंपराओं संप्रदायों आदि के संतों को जनहित के लिए अनुदान राशि देवे, जिससे संत समाज जरूरतमंदों तक पहुंचाए लोगों की आस्था विश्वास शंकराचार्य सहित संतों में है ना कि तथाकथित संगठनों में है इसलिए संत समाज केंद्र सरकार से अपील करता है की जनकल्याण सहयोग के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि को मान्य चारों पीठों के जगद्गुरु शंकराचार्य, अखाड़ा परिषद संत समाज को सौपे जिस से उसका वितरण निष्ठा सेवा भाव की भावना से हो सके इस कार्य में किसी प्रकार की राजनीतिक अथवा निजी स्वार्थ की भावना ना होवे.
महंत ने कहा कि आज प्रत्येक भारतवासी को सोचना है कि आर्थिक मंदी के खिलाफ किस प्रकार से लड़ना होगा
भारत को आर्थिक मंदी से मुक्त कराना सभी सुख शांति सम्मान से अपना जीवन यापन करें सर्वत्र सुख शांति सद्भाव का वातावरण उत्पन्न हो,यह सबका उत्तरदायित्व बनता है करोना महामारी को दफनाना है देश को ऋण मुक्त कराना है यह संकल्प हम सबको लेना होगा किसान प्रवासी मजदूर नौजवान अपने अपने कामों में लग जाएं हिंदू मुसलमान करने से देश उन्नति नहीं कर पाएगा और ना ही चुनाव से पेट भरने वाला है चुनाव जब जहां होना होगा हो जाएगा उसके लिए पूरे देश के प्रवासी मजदूर किसान नौजवानों को परेशान करना उचित है क्या? करोना का भ्रम दिखाकर अपने विरोधियों पर प्रहार करना देश की आर्थिक व्यवस्था को चौपट करना अकल मंदी नहीं है बेरोजगारी की फौज से देश अंतरिक्ष में जाने वाला नहीं है “हर हाथ को काम हर खेत में पानी” की व्यवस्था एवं सिद्धांत से चलना होगा तभी जा कर देश खुशहाल संपन्न एवं ऋण मुक्त हो सकेगा इसके लिए सकारात्मक सृजनात्मक रचनात्मक भावनात्मक चिंतन विचारधारा की जरूरत है ना की विभाजन करने वाली विचारधारा की.
