अखिल भारतीय संत एकता आंदोलन परिषद एवं गुरु गोरक्षनाथ मानव कल्याण संस्थान कपूरथला पंजाब के परमाध्यक्ष महंत कैलाश नाथ हठयोगी ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सौंदर्यीकरण एवं कोरिडोर के नाम पर काशी के प्राचीनतम मंदिरों को तोड़ा जा रहा है जिसकी सूचना स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने सब प्रमाण सोशल मीडिया पर काशी खंड स्कंद पुराण में वर्णित काशी खंड का उदाहरण के महत्व को बताते हुए सभी देशवासियों सनातन धर्मावलंबियों से मार्मिक अपील की है कि दलगत राजनीति जाति पंथ परंपरा से ऊपर उठकर धर्म स्थानों एवं काशी के सनातन संस्कृति की रक्षा करने के लिए आगे आएं।
महंत ने कहा कि काशी में सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी महाराज संस्कृत की शिक्षा ग्रहण करने गए थे मुस्लिम बादशाह शाहजहां के लड़के पुत्र दारा शिकोह भी संस्कृत अध्ययन करने के लिए काशी नगरी में गए थे काशी की संस्कृति सभ्यता विशेषज्ञ मानव समाज के उत्थान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही है काशी में बौद्ध धर्म का स्तूप सारनाथ ऐतिहासिक स्थल है जहां संपूर्ण विश्व के बौद्ध धर्म अनुरागी आते हैं जो भी काशी की गरिमा एवं धरोहर है सौंदर्य करण कॉरिडोर के नाम पर मठ मंदिरों को तोड़ना कौन सा हिंदुत्व है हिंदुत्व के नाम पर मठ मंदिरों को तोड़कर इतिहास पुरुष बनने का स्वप्न कभी भी किसी का भी साकार नहीं हुआ है
धर्म विरुद्ध काम करने के कारण से देवी आपदा देश समाज पर आती है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण कोरोना संक्रमण महामारी एवं चौपट अर्थव्यवस्था है हठयोगी ने प्रवासी मजदूरों किसानों नौजवानों पूर्व सैनिकों देश समाज के शांति प्रिय मानवता में विश्वास रखने वाले लोगो से अनुरोध किया है कि काशी की रक्षा सुरक्षा के लिए देशवासी आ गए हैं हिंदू मुसलमान अलगाव वाद धर्मान्धता से अलग हटकर काशीवासी एवं देशवासी संस्कृति रक्षार्थ आगे आएं इस सामाजिक धार्मिक मानवतावादी कार्य में सभी सहयोग करें हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई बौद्ध यहूदी पारसी सभी को आगे आना होगा नहीं तो इतिहास में कल को देश समाज कि मोन स्थिति दिखाई देगी जिसको आने वाली पीढ़ी क्षमा नहीं करेगी जिससे धर्म स्थानों तीर्थ स्थानों सनातन संस्कृति काशी की गरिमा की रक्षा हो सके देश में सर्वत्र लॉक डाउन है
जिसका पालन संपूर्ण देशवासी कर रहे हैं लेकिन आयोध्या एवं काशी में लॉक डाउन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं यह दोहरा मापदंड क्यों? सरकारी भूमि सड़क की पटरियों पर अवैध दुकानें खोलकर धर्म विशेष का झंडा लगाकर देश समाज के अंदर संप्रदायिकता का विष घोला जा रहा है यह कौन सा हिंदुत्व है एवं कौन सी देशभक्ति है? ऐसा वातावरण निर्माण करने के विरुद्ध धार्मिक सामाजिक संगठन खामोश क्यों है? क्या यह संगठन तनावपूर्ण स्थिति होने पर शोक सभा के लिए आगे आएंगे? सरकारी सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से निर्माण एवं कब्जे को सरकार प्रशासन मुक्त कराएं इससे समाज तनाव मुक्त होगा सरकार की छवि सुधरेगी.
