
अमेरिका, इजरायल व ईरान के बीच युद्ध का असर अब मेडिकल टूरिज्म पर भी पड़ने लगा है। ओद्योगिग नगरी के कई निजी अस्पतालों में खाड़ी देशों से आने वाले मरीजों की संख्या घट गई है। पहले विदेश से बड़ी संख्या में मरीज यहां आकर इलाज कराते थे। अब स्थिति बिल्कुल बदल गई है। जिले के अधिकांश निजी अस्पतालों में इंटरनेशनल लांज खाली पड़े हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो अपने जिले में बेहतर सुविधा के साथ ही इलाज अन्य देशों की अपेक्षा सस्ता है। मगर अब युद्ध के चलते स्थिति बिगड़ गई है। वर्तमान हालात में युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है और सुरक्षा के मुद्दे के कारण भी मरीजों और उनके स्वजन ने यात्रा टाल दी है।
पहले हर महीने 50-60 विदेशी मरीज आते थे
ग्रेटर फरीदाबाद स्थित एकार्ड अस्पताल के रिकार्ड की बात करें तो यहां पहले हर महीने 50 से 60 मरीज विदेश से आते थे। मगर अब बिल्कुल भी नहीं आ रहे हैं। अन्य अस्पतालों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। बता दें कि जिले में अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण कई बड़े अस्पताल हैं, जिन्होंंने चिकित्सा सुविधाओं के दम पर अलग पहचान बनाई है।
अपने यहां चिकित्सा सुविधाएं विकसित देशों के मुकाबले बहुत ही सस्ती हैं। यही वजह है कि खाड़ी देशों के मरीज यहां इलाज को प्राथमिकता देते रहे हैं। दूसरे देशों की तुलना में हमारे यहां इलाज का खर्चा लगभग 40 प्रतिशत कम आता है, जबकि इलाज की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है। मगर इस युद्ध ने स्थिति को प्रभावित किया है। इजरायल और ईरान से कोई मरीज नहीं आ रहा है। -डॉ. युवराज कुमार, इंटरनेशनल मार्केटिंग विभाग प्रमुख, एकार्ड अस्पताल
पहले हमारे यहां अस्पताल में सऊदी अरब, इराक, ओमान, उज़्बेकिस्तान तथा कुवैत जैसे देश से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते थे। हृदय रोग, किडनी से जुड़ी बीमारियां, हड्डी संबंधी समस्याएं और कैंसर के मामले सबसे अधिक होते थे। अब ऐसी स्थिति नहीं है। इसका असर मेडिकल टूरिज्म पर दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में दूसरे देशों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में कमी आई है। अगर जल्दी ही हालात सामान्य नहीं हुई तो मेडिकल टूरिज्म को और अधिक नुकसान हो सकता है। – डॉ. सुमंत गुप्ता, कैंसर विभाग प्रमुख, मेट्रो अस्पताल
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