
फरीदाबाद: शहर में वर्षा के पानी की निकासी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ओल्ड फरीदाबाद और एनएचपीसी रेलवे अंडरपास की तस्वीर बदलती नजर नहीं आ रही। शुक्रवार को हुई वर्षा के बाद दोनों अंडरपास में इतना पानी भर गया कि शनिवार को 24 घंटे बाद भी पूरी तरह निकासी नहीं हो सकी। ओल्ड फरीदाबाद रेलवे अंडरपास में पानी करीब 20 फुट तक पहुंच गया। नतीजा यह रहा कि महत्वपूर्ण रास्ते बंद होने से हजारों लोगों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। अंडरपास में एक स्कूल बस और फार्च्यूनर कार भी डूब गई। वहीं एनएचपीसी अंडरपास में भी एक कार डूब गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जलभराव से निपटने के लिए योजनाएं, पंप और करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अंडरपास हर तेज वर्षा में तालाब क्यों बन जाते हैं?
हादसे के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
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इसके बाद एफएमडीए ने ओल्ड फरीदाबाद अंडरपास से सेक्टर-21ए डिस्पोजल तक 1,100 मीटर नई ड्रेनेज लाइन डालने की योजना बनाई। इसके साथ पुरानी ड्रेनेज लाइन की करीब तीन किलोमीटर लंबाई में गाद निकालने और अंडरपास में पंपिंग स्टेशन बनाने की योजना भी सामने आई थी। दोनों ड्रेनेज कार्यों के लिए करीब ढाई करोड़ रुपये का बजट बताया गया था।
मानसून से पहले भी हुई थी तैयारियों की समीक्षा
इस साल मानसून से पहले उपायुक्त आयुष सिन्हा ने ओल्ड फरीदाबाद और एनएचपीसी समेत जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया था। अधिकारियों को अंडरपास में पंपसेट की जांच, पर्याप्त बैरिकेडिंग और पंप आपरेटरों की 24 घंटे तैनाती के निर्देश दिए गए थे। नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया था। नगर निगम ने जुलाई में जलभराव से निपटने के लिए प्रत्येक जोन में 24 घंटे सक्रिय रहने वाली इमरजेंसी टीम बनाने की भी तैयारी की थी। प्रशासन ने जलभराव से निपटने के लिए माकड्रिल भी की थी।
पहली वर्षा ने खोल दी थी पोल
मानसून की पहली वर्षा में ही ओल्ड फरीदाबाद रेलवे अंडरपास को बंद करना पड़ा था। वहीं एनएचपीसी क्षेत्र सहित शहर के कई हिस्सों में जलभराव हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ स्थानों पर जलनिकासी का समय पहले की तुलना में कम हुआ, लेकिन प्रमुख अंडरपास अब भी चुनौती बने हुए हैं। एनएचपीसी अंडरपास के लिए भी एफएमडीए ने मास्टर सीवर योजना के तहत 900 एमएम की सीवर लाइन डालने की योजना बनाई थी। इस कार्य की लागत करीब 2.34 करोड़ रुपये बताई गई थी।
पानी भरते ही रास्ते बदलने को मजबूर शहर
अंडरपास बंद होने से इसका असर केवल आसपास के लोगों तक सीमित नहीं रहता। ओल्ड फरीदाबाद अंडरपास बंद होने पर एनआइटी क्षेत्र और हाईवे के बीच सीधा संपर्क प्रभावित होता है। वाहन चालकों को नीलम, बड़खल और बाटा चौक की ओर घूमकर जाना पड़ता है। इससे इन मार्गों पर अचानक यातायात का दबाव बढ़ जाता है और जाम की स्थिति बनती है। सितंबर 2024 में भी अंडरपास बंद होने के बाद लोगों को पांच मिनट के रास्ते के लिए कई किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ा था। यानी समस्या केवल अंडरपास में जमा पानी की नहीं है। एक अंडरपास डूबता है तो उसके साथ शहर का यातायात तंत्र भी प्रभावित हो जाता है।
सवाल स्थायी समाधान का
प्रशासन ने जलनिकासी लाइन, पंपिंग स्टेशन, पंपसेट, बैरिकेडिंग और इमरजेंसी टीम जैसी व्यवस्थाओं पर काम किया है। इसके बावजूद यदि तेज वर्षा के बाद अंडरपास में पानी 20 फुट तक पहुंच जाता है और 24 घंटे बाद भी निकासी पूरी नहीं हो पाती, तो अब निगाह इस बात पर है कि योजनाओं का जमीन पर कितना असर हुआ।
2024 के जानलेवा हादसे के बाद से लेकर 2026 के मानसून तक व्यवस्थाओं पर कई बार काम हुआ, लेकिन ओल्ड फरीदाबाद अंडरपास का पानी फिर वही सवाल पूछ रहा है, आखिर स्थायी समाधान कब होगा?
24 घंटे में 78.75 एमएम वर्षा
सात अगस्त सुबह आठ बजे से आठ अगस्त सुबह आठ बजे तक जिले में 78.75 एमएम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे अधिक वर्षा तिगांव क्षेत्र में 123 एमएम हुई। इसके बाद शहर में 120 एमएम दर्ज की गई।
दो दिन में हुई वर्षा
तहसील वर्षा (एमएम में)
- फरीदाबाद – 120
- तिगांव – 123
- बल्लभगढ़ – 60
- मोहना – 43
- दयालपुर – 48
- बड़खल – 100
- धौज – 70
- गौंछी – 66
डीसी बोले, जारी है निगरानी
जिला उपायुक्त आयुष सिन्हा के अनुसार नगर निगम, एफएमडीए, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को फील्ड में तैनात किया गया है।
शहर के प्रमुख चौक, मुख्य मार्गों, अंडरपास, व्यस्त यातायात मार्गों एवं संवेदनशील स्थानों पर वाटर पंपिंग टैंकर, पंपिंग सेट तथा अन्य आवश्यक मशीनरी तैनात कर दी है। जल निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी की जा रही है। उपायुक्त ने आमजन से अपील की है कि अगले 24 घंटे में भारी वर्षा की आशंका को देखते हुए अति आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलें।
NEWS SOURCE Credit : jagran
