नशे की लत ने आज की पीड़ी को बरबाद कर दिया है। कई ऐसे मामले आए जिसमें युवाओं ने नशे के चलते किसी वारदात को अंजाम दिया हो, तो कई युवाओं ने कहा कि नशा नहीं छूट रहा तो सुसाइड कर रहे हैं। कई की नशे के कारण मौत हो गई।
लेकिन सबसे बड़ी बात ये कि आखिर हरियाणा-पंजाब में नशे को बढ़ावा कौन दे रहा है? तो अब बड़ा खुलासा हुआ है कि इन युवाओं तक नशे की खेप पहुंचाने में विदेशियों का बड़ा हाथ है।
दरअसल, पिछले दिनों अंबाला में स्मैक की खेप के साथ कुछ आरोपी पकड़े गए, तो जांच में STF की टीम के सामने आया है कि 7 नाइजीरियन ऐसे हैं, जो दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा-पंजाब में पढ़ाई कर रहे हैं और नशा भी सप्लाई करते हैं। ये लोग सभी ग्राहकों तक नशीला पदार्थ पहुंचाने के लिए whatsapp काल और Messaging का सहारा लेते हैं।
हैरान करने वाली बात देखिये जरा जिन नंबरों से नशे की सप्लाई होती है, उन पर Incoming Call नहीं होती। ज्यादातर नंबर इनमें सालों पहले बंद हो चुके होते हैं या फिर विदेशी नंबर होते हैं। ऐसे में इन्हें ट्रेस करना पुलिस के लिए सिरदर्द बन जाता है। पुलिस ने अब Whatsapp के जरिए गोरखधंधा संचालित करने वालों को पकड़ने के लिए हाईटेक तकनीक अपनानी शुरू कर दी है।
यूटी के अलावा पंजाब और पंचकूला पुलिस आए दिन नाइजीरियन (विदेशी) को स्मैक की सप्लाई करने के आरोप में कार्रवाई करती है। इसमें पुलिस की पकड़ में वही विदेशी आते हैं जिनका ठिकाना निर्धारित होता है। इसमें कुछ तो हास्टल में रहकर पढ़ाई करते हैं तो कुछ टूरिस्ट वीजा पर भारत का भ्रमण करने के लिए आए रहते हैं।
पुलिस सूत्रों की मानें तो पश्चिमी दिल्ली में सक्रिय नाइजेरियन हरियाणा और पंजाब के युवाओं को ड्रग देते हैं। नाइजेरियरन वाट्सअप कॉल और मैसेज से डील कर रहें हैं। डील होने के बाद नशे के सौदे की डिलीवरी के लिए दिल्ली बुलाते हैं। दिल्ली में पहुंचने के बाद वाट्सअप काल पर बताए लोकेशन पर पहुंचने पर स्मैक देते।अब पुलिस ने नशा सप्लाई करने वाले सभी आरोपियों की लिस्ट तैयार कर ली है और नकेल कसना शुरू कर दिया है।
