Close Menu
  • होम
  • देश-विदेश
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • फरीदाबाद
  • वायरल
  • जॉब अलर्ट
  • सेहत
  • क्राईम
  • मनोरंजन
  • संपर्क करें
Facebook WhatsApp
Facebook WhatsApp
Faridabad News24
  • होम
  • देश-विदेश
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • फरीदाबाद
  • वायरल
  • जॉब अलर्ट
  • सेहत
  • क्राईम
  • मनोरंजन
  • संपर्क करें
Facebook WhatsApp
Faridabad News24
  • होम
  • देश-विदेश
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • फरीदाबाद
  • वायरल
  • जॉब अलर्ट
  • सेहत
  • क्राईम
  • मनोरंजन
  • संपर्क करें
Home » चाचा कहने में जो आत्मीयता है वह अंकल कहने में कहां… , ये है हिंदी भाषा की भावनात्मकता

चाचा कहने में जो आत्मीयता है वह अंकल कहने में कहां… , ये है हिंदी भाषा की भावनात्मकता

faridabadnews24By faridabadnews24September 14, 2020No Comments2 Mins Read

नई दिल्ली : अंग्रेजी के प्रभाव से रिश्तों की आत्मीयता भी सिमट रही है। समाज में ताऊ, चाचा, मामा, फूफा के लिए अंकल तो ताई, चाची, मामी, बुआ के लिए आंटी शब्द का प्रयोग होने लगा है। इसी तरह दादा-नाना के लिए ग्रांड फादर और दादी-नानी के लिए ग्रांड मदर का इस्तेमाल कर लोग अंग्रेजियत की दौड़ में हिंदी के साथ संबंधों में मधुरता के रस को भी नीरस कर रहे हैं। हालांकि कुछ युवा आज भी इस अंधी दौड़ से अलग हैं।

युवा मनुप्रतीक गुप्ता कहते हैं कि अपने सगे चाचा को भी अंकल कहकर अपनत्व का बोध नहीं होता, जबकि अपने पिता से छोटे किसी भी दूसरे व्यक्ति को भी चाचा कहकर उनसे संबंध आत्मीय हो जाते हैं। हिंदी कितनी समृद्ध और आत्मीयता का बोध कराने वाली भाषा है, इसका उदाहरण उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू भी अपने संबोधनों में देते रहे हैं। नायडू के अनुसार कि माता के लिए अंग्रेजी में मदर, मॉम और फिर मां बोलकर देखें तो ऐसा लगता है कि मां शब्द व्यक्ति के अंदर से निकला है।

बैठक को ड्राइंगरूम, बरामदे को पोर्च कहकर हिंदी से जा रहे दूर

घर आंगन से लेकर कामकाज के दौरान रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं और जगहों के नाम भी हिंदी व इसके आंचलिक शब्दकोष से निकलकर अंग्रेजी की तरफ दौड़ने लगे हैं। बैठक को ड्राइंगरूम, बरामदे को पोर्च कहकर लोग आधुनिकता की अंधी दौड़ में इतनी तेजी से भाग रहे हैं कि अपनी मातृभाषा हिंदी से दूर जा रहे हैं। इतना ही नहीं कुर्सी मेज अब टेबल-चेयर हो गई हैं। शरीर के जिन अंगों को लेकर कवियों ने अमर कविताएं लिख दीं उन्हें भी अंग्रेजी में पुकारकर लोग अपने ही शरीर से दूर होते जा रहे हैं।

अंग्रेजी में पूरक शब्दों का अभाव

हिंदी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. ठाकुरदास दिनकर का कहना है कि दुनिया में अंग्रेजी का शब्दकोष सबसे बड़ा माना जाता है। बावजूद इसके अंग्रेजी में पूरक शब्दों का अभाव है। हिंदी की जननी वैज्ञानिक भाषा संस्कृत है। कुछ लोग जानबूझकर आधुनिकता का दिखावा कर अपनी मातृभाषा में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करते हैं। जिन संबंधों को हिंदी में पुकारने पर आत्मीयता झलकती है, उनके लिए अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल बेमायने हैं।

Faridabad News faridabadnews24 this is the sentimentality of Hindi language where is it in saying uncle Where is the affinity in saying uncle
Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on YouTube
Share. Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram Copy Link
faridabadnews24

Related Posts

10 लाख से 33 लाख तक की निःशुल्क बीमा योजनाओं के नए नियम लागू, पत्रकारों के लिए MBW का सुरक्षा कवच

June 17, 2026

रेप के बाद हत्या की आशंका, गुरुग्राम में महिला की नंगी लाश मिलने से सनसनी

June 15, 2026

कैशियर की मौत, चंडीगढ़ के सेक्टर 11 में मेडिकल स्टोर पर फायरिंग, देखें CCTV फुटेज

June 15, 2026
Leave A Reply Cancel Reply

Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • देश-विदेश
  • फरीदाबाद
  • हरियाणा
  • कारोबार
  • क्राईम
  • मनोरंजन

Company

  • Information
  • Advertising
  • Classified Ads
  • Contact Info
  • Do Not Sell Data
  • GDPR Policy

Services

  • Subscriptions
  • Customer Support
  • Bulk Packages
  • Newsletters
  • Sponsored News
  • Work With Us

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2026 ThemeSphere. Designed by CSe.
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.