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Home » बिहार विधानसभा चुनाव के वोटिंग ट्रेंड को देखें तो इस बार भी पिछले चुनाव के बराबर ही मतदान होता नजर आ रहा है

बिहार विधानसभा चुनाव के वोटिंग ट्रेंड को देखें तो इस बार भी पिछले चुनाव के बराबर ही मतदान होता नजर आ रहा है

faridabadnews24By faridabadnews24November 4, 2020No Comments5 Mins Read

बिहार विधानसभा : बिहार विधानसभा चुनाव के तीन चरणों में से दो चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है. मंगलवार को दूसरे चरण के 17 जिलों की 94 सीटों पर 54.64 फीसदी मतदान रहा और 1463 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम मशीन में कैद हो चुकी है. इससे पहले 71 सीटों पर मतदान हो चुका है. इस तरह से बिहार की 243 सीटों में से 165 सीटों पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके हैं और बाकी बची 78 सीटों पर 7 नवंबर को वोटिंग होगी.

बिहार विधानसभा चुनाव के वोटिंग ट्रेंड को देखें तो इस बार भी पिछले चुनाव के बराबर ही मतदान होता नजर आ रहा है. पहले चरण में 71 सीटों पर 55.9 फीसदी मतदान हुआ था जबकि 2015 के चुनाव में 54.75 फीसदी और 2010 के चुनाव 50.67 फीसदी वोटिंग हुई थी. ऐसे ही दूसरे चरण की 94 सीटों के वोटिंग पैटर्न को देखें तो यहां 54.64 फीसदी मतदान हुआ जबकि 2015 के चुनाव में 56.17 फीसदी और 2010 में 51.7 फीसदी वोट डाले गए थे. इस तरह से बिहार के दो चरणों के 165 सीटों पर हुई वोटिंग देंखे तो औसत करीब 55 फीसदी आता है.

पहले चरण की 71 सीटों में से 24 सीटों पर ही पिछली बार के मुकाबले वोटिंग बढ़ी है जबकि दूसरे चरण की 94 सीटों से 38 सीटों पर 2015 से ज्यादा रही है. वोटिंग फीसदी के घटने-बढ़ने का सीधा असर चुनावी नतीजों पर भी पड़ता है. हालांकि, अभी तक वोटिंग का जो ट्रेंड देखने को मिला है वो 2015 की तरह ही नजर आ रहा है, लेकिन सवाल ये है कि क्या ये वोटिंग बिहार में कोई बदलाव करेगी या फिर नीतीश कुमार पर ही भरोसा करेगी?

दरअसल, 2015 के चुनाव के लिहाज से देखें तो पहले चरण की 71 सीटों में से एनडीए को 14 सीटें मिली थीं, जिनमें से 13 बीजेपी और एक सीट जीतनराम मांझी ने जीती थी. वहीं, 2015 के चुनाव में लालू यादव और नीतीश कुमार साथ थे और महागठबंधन को 53 सीटें मिली थीं, जिनमें 27 सीटें आरजेडी, 18 सीटें जेडीयू और 8 सीटें कांग्रेस को मिली थीं.

वहीं, दूसरे चरण की 94 सीटों में से महागठबंधन ने 70 सीटें जीती थीं, जिनमें 33 सीटें आरजेडी, 30 सीटें जेडीयू और 7 सीटें कांग्रेस को मिली थीं. वहीं,  एनडीए ने 22 सीटें जीती थीं, जिनमें 20 सीट बीजेपी को मिली थी जबकि दो सीटें एलजेपी के खाते में गई थीं. इसके अलावा दो सीटें अन्य दलों को मिली थी. हालांकि, 2015 के चुनाव में जेडीयू और बीजेपी अलग-अलग लड़ी थीं, लेकिन इस बार दोनों एक साथ हैं और बिहार के राजनीतिक समीकरण काफी अलग हैं.

बिहार के अभी तक दो चरणों की जिन 165 सीटों पर चुनाव हुए हैं, उन पर कुल 2529 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. पहले चरण की 71 सीटों पर 1066 और दूसरे चरण की 94 सीटों पर 1463 प्रत्याशी थे. महागठबंधन की ओर से आरजेडी पहले चरण में 42 और दूसरे चरण में 56 सीटों पर यानी कुल 98 प्रत्याशी मैदान में थे. आरजेडी की सहयोगी कांग्रेस दोनों चरणों में 45 और वामपंथी दल के 22 प्रत्याशी थे. वहीं, एनडीए की ओर से देखें तो जेडीयू के पहले चरण में 35 और दूसरे चरण में 43 प्रत्याशी थे. इस तरह से बीजेपी के 29 और 46 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे. इसके अलावा एनडीए के सहयोगी जीतनराम मांझी की पार्टी के 6 और वीआईपी पार्टी के 6 प्रत्याशी अभी तक किस्मत आजमा चुके हैं.

दूसरा चरण इसलिए है अहम
बिहार में दूसरे चरण की वोटिंग से नीतीश कुमार की किस्मत तय होगी. बिहार में तीनों चरणों की सीटों को देखा जाए तो सबसे अधिक सीटों की संख्या इस चरण में ही है. इसमें जिस पार्टी को जितनी ज्यादा बढ़त मिलेगी, उसका फायदा चुनावी नतीजों में देखने को मिल सकता है. यही वजह है कि दूसरे चरण के लिए राजनीतिक दलों ने सबसे अधिक ताकत झोंकी थी. ये नीतीश कुमार के लिए चुनाव का सबसे निर्णायक राउंड था, क्योंकि सबसे ज़्यादा सीटों पर वोटिंग भी इसी राउंड में हुई.

कहा जा रहा है कि अगर बिहार में अगर कोई एंटी-इनकम्बेंसी फैक्टर है तो इसका टेस्ट  इसी  चरण में हो गया है. 94 सीटों में 53 फीसदी सीटें पिछले चुनाव में जेडीयू या फिर बीजेपी के पास थीं. दूसरे चरण की 42 सीटें ऐसी थीं जिनमें एक ही पार्टी दो बार से चुनाव जीत रही है. पहले राउंड में जिन 71 सीटों पर वोटिंग हुई थी, वो महागठबंधन के प्रभाव वाले इलाके थे. दूसरे राउंड में जिन 94 सीटों पर वोटिंग हुई है. वहां बीजेपी की पकड़ मजबूत मानी जाती है. यही वजह है कि दूसरे राउंड में बीजेपी अपने सहयोगी जेडीयू से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

दूसरे चरण में सवर्ण जातियों और अति पिछड़ी जाति के वोटों की अच्छी खासी संख्या है. इन 94 सीटों में बिहार की 48 फीसदी शहरी आबादी भी रहती है इस शहरी आबादी में बीजेपी हमेशा से अच्छा परफॉर्मेंस करती रही है इसीलिए कहा जा रहा है कि ये 94 सीटें नीतीश कुमार और बिहार में उनके एनडीए गठबंधन का भविष्य तय करने वाली हैं, लेकिन इसका फैसला 10 नवंबर को नतीजा आने के बाद ही सामने आएगा.

faridabadnews faridabadnews24 If you look at the voting trend of Bihar Assembly elections this time also the voting is seen to be equal to the last election.
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