दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का प्रभाव क्षेत्र में भिंडी, बैंगन, लौकी, टमाटर आदि सब्जियों पर नजर आने लगा है। इन सब्जियों को तुड़वाने का खर्च भी किसानों को नहीं मिल रहा है। पिछले छह दिन से लगातार इन सब्जियों के भावों में गिरावट आ रही है। थोक मंडी में भिंडी 3 रुपये, लौकी 1 रुपये, बैंगन 2 रुपये, टमाटर व खीरा ककड़ी 5-5 रुपये के भाव में ली जा रही है। ऐसे में अब किसान इन सब्जियों को तोड़कर खेतों में ही रखने को मजबूर हो रहे हैं।
गौरतलब है कि क्षेत्र से भिंडी, बैंगन, लौकी, टमाटर आदि सब्जियां दिल्ली भेजी जाती है। दिल्ली में किसान आंदोलन चल रहा है। ऐसे में कुक्षी तहसील में इन दिनों सब्जी उत्पादक किसान परेशान हैं। सुसारी क्षेत्र के किसान लोकेश पाटीदार, कमल माड़वीवाला व अंतिम मुकाती ने बताया कि भिंडी महज दो रुपये किलो के भाव में ली जा रही है। लौके व बैंगन तो कोई लेने को तैयार ही नहीं है। ऐसे में इन सब्जियों को खेत में ही तोड़कर रख रहे हैं। यदि इनकी तुड़ाई नहीं करेंगे, तो पौधों पर वजन बढ़ जाएगा। ऐसे में अगली बार सब्जी कम आएगी। ऐसे में इन्हें तोड़ना जरूरी है।

ग्राम देशवालिया के पाली हाउस में खेती करने वाले संजय पाटीदार ने बताया कि खीरा ककड़ी 15 दिन पहले 12 से 15 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। अब 4 से 5 रुपये के भाव आ गए हैं। सुसारी के टमाटर उत्पादक किसान राजू एमएम ने बताया कि टमाटर भी अब 4 से 5 रुपये प्रति किलो लिए जा रहे हैं। ऐसे में तोड़ने व मंडी तक ले जाने का खर्च ही इतना आ जाता है कि लागत तक नहीं निकलेगी। इसी कारण इन्हें तोड़कर अब खेतों में रखना पड़ रहा है। सब्जियों के भावों में इस तरह की कमी पहली बार देखी जा रही है।
भिंडी उत्पादक किसान लोकेश पाटीदार ने बताया कि एक क्विंटल भिंडी की तुड़ाई में तीन मजदूर लगते हैं, जिन्हें 500 रुपये तक की मजदूरी दी जाती है। उसके बाद इन सब्जियों को पाउच में पैक करने में 100 रुपये का खर्च आता है। इसके बाद मंडी तक का खर्च अलग। उसके बाद मंडी में 200 रुपये प्रति क्विंटल ली जा रही है। जबकि तुड़ाई का खर्च 600 रुपये आ रहा है। ऐसे में अन्य खर्च व आय की बात, तो आप छोड़ दीजिए। पिछले छह दिन से लगतार भाव यही बने हुए हैं।
कुक्षी की सब्जी मंडी के थोक में सब्जी खरीदने वाले संजय माली ने बताया की भिंडी 3 से 4 रुपये, लौकी 1 रुपये, बैंगन 2 रुपये व टमाटर के 4 से 5 रुपये प्रति किलो भाव में लिए जाने की वजह सब्जियों का दिल्ली तक नहीं पहुंच पाना है। प्रदेश से बाहर कई स्थानों पर रात का लॉकडाउन होने से मंडियों बंद रहना भी एक वजह है।
