कटिहार : कोरोना काल में घर लौटे प्रवासी मजदूरों के लिए गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत रोजगार परक सब्जी उत्पादन की नई तकनीक विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कृषि विभाग के तत्वावधान में प्राणपुर प्रखंड के जला हरीरामपुर गांव में आयोजित शिविर का उदघाटन जिला कृषि पदाधिकारी दिनकर प्रसाद सिंह ने किया।

आमदनी के लिहाज से भी बनेगा वरदान
जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि जैविक खेती सेहत के साथ आमदनी के लिहाज से भी वरदान है। उन्होंने जैविक सब्जी की खेती को समय की मांग की बताते हुए इसके बारे में आवश्यक जानकारियां भी दी। उन्होंने सरकार की इस महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील किया।
रसायनिक खाद से उत्पादित सब्जी सेहत के लिए खतरनाक
केवीके वैज्ञानिक डा. के पी सिंह ने किसानों को रासायनिक खाद के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए बताया कि इसके उपयोग से मानव मधुमेह ,उच्च रक्तचाप ,हृदयाघात व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं । इन सभी बीमारियों से बचने के लिए जैविक खेती आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती का उद्देश्य मिट्टी, पशुओं और मनुष्य के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फसल की उत्पादकता को बढ़ाना है । उन्होंने गुणवत्ता युक्त फसल और मिट्टी की उर्वरा शक्ति को पीढ़ी दर पीढ़ी टिकाऊ बनाए रखने के लिए जैविक सब्जी की खेती करने की सलाह दी ।
उन्होंने रसायनों के बदले फौसम नाइट्रोजा, बायो फास एजोटोबेक्टर एजोस्पिरिलम ,नील हरित शैवाल ,अजोला, केंचुआ, खाद गोबर आदि के उपयोग की सलाह दी। डॉ ङ्क्षसह ने जैव उर्वरक के उपयोग के फायदे जैसे गुणवत्ता युक्त फसल और मिट्टी की उर्वरा शक्ति, मिट्टी में बायोमास की मात्रा विटामिन हारमोंस जल धारण क्षमता व सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि होता है, जो मिट्टी और पर्यावरण दोनों के लिए अति आवश्यक है। इस अवसर पर जिला कृषि पदाधिकारी और उद्यान वैज्ञानिक आलू ,बैगन ,मिर्च ,टमाटर, फूल गोभी ,मटर, लहसुन, लाफा साग, पालक साग ,पपीता इत्यादि की जैविक खेती का स्थल निरीक्षण भी किया। अधिकारियों द्वारा विभिन्न उत्पाद जैसे आमला का मुरब्बा ,पेठा पेड़ा, पापड़ बरी, स्वनिर्मित जूट की चटाई, मशरूम, स्वनिर्मित सीमेंट का गमला, स्वनिर्मित कच्चा वर्मी कंपोस्ट यूनिट आदि का भी निरीक्षण किया। मौके पर आनंद शर्मा ,अक्षय कुमार ,लोटन देवी के साथ काफी संख्या में किसान मौजूद थे।
