प्रयागराज : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को ऑनलाइन बौद्धिक संगोष्ठी ‘काश ! आज गांधी होते का आयोजन हुआ। इसमें ‘बापू के व्यक्तित्व, कृतित्व और मौजूदा समय में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर बुद्धिजीवी खुलकर बोले। संगोष्ठी में प्रयागराज के अलावा यूपी के अन्य जिलों व दूसरे राज्यों से भी लोग जुड़े। आयोजन बौद्धिक, शैक्षिक और सामाजिक संस्था सर्जनपीठ ने किया।

बौद्धिक, शैक्षिक और सामाजिक संस्था सर्जनपीठ ने की ऑनलाइन संगोष्ठी
पुणे से ऑनलाइन जुड़ीं डा. नीलम जैन ने कहा कि आज अहिंसा की तिजोरी खाली है, हिंसा का तांडव जारी है। देश को गांधी जी-जैसा नेतृत्व मिल जाये तो भारत सोने की चिडिय़ा फिर बन सकता है। भोपाल से जुड़े अशोक चंद्र दुबे ने कहा, गांधी रोम-रोम अहिंसा वादी थे। उन्हेंं किसी भी मूल्य पर हिंसा स्वीकार नहीं थी। वाराणसी से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार विश्वेश्वर कुमार ने कहा कि राष्ट्रपिता आज होते तो दो महीने से देश की राजधानी घेरकर बैठे अन्नदाताओं के बीच जरूर जाते, उन्हेंं खेतों की ओर लौट आने को राजी करते और लाल किला पर उपद्रव करने वालों को उसका राष्ट्रीय महत्त्व बताते। वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर श्रीवास्तव ने कहाकि आज अगर गांधी की उपस्थिति होती तो शायद राजनैतिक, सामाजिक तथा मानवीय मूल्यों में इतनी गिरावट न आयी होती। संगोष्ठी के आयोजक आचार्य पं. पृथ्वीनाथ पांडेय ने कहा, आज ऐसा वातावरण बना दिया गया है कि जनता अपना दर्द पीकर रह जाती है। जब रक्षक ही भक्षक बन जायें तब न्याय की अपेक्षा भला किससे की जाये। प्रयागराज से साहित्यकार डा. प्रदीप चित्रांशी, इविवि के शिव प्रसाद शुक्ल, डा. सरोज सिंह, विधायक डा. संगीता बलवन्त, अंजु चन्द्रामल (कवयित्री और नायब तहसीलदार, बलिया), पानीपत हरियाणा की डा. संगीता श्रीवास्तव शकुन्तला चौहान ने भी विचार व्यक्त किए।
