नई दिल्ली : देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्तमंत्री का पद संभालते वक्त निर्मला सीतारमण को आभास भी नहीं होगा कि उनके सामने कितनी चुनौतियां आने वाली हैं। कोरोना ने काल बनकर अर्थव्यवस्था पर चोट की तो लॉकडाउन ने आर्थिक सेक्टर को लॉक करके रख दिया। खाली खजाने के साथ ही देश के आंतरिक हालात भी अर्थव्यवस्था के लिए माकूल नहीं हैं। दिल्ली में किसान कृषि बिल के विरोध में जमे हैं तो चीन के साथ तनातनी महीनों से जारी है। इन सबके बीच सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सरकारी खजाने पर भी कोरोना की मार पड़ी है। आर्थिक जानकार भी सहमत हैं कि बजट कोई जादू की छड़ी नहीं है। अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में समय लगता है। कमजोर खजाने के साथ विकास को पुनर्जीवित करना, कमजोर क्षेत्रों में सहायता प्रदान करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।

कमजोर खजाने को पुनर्जीवित करने के लिए मोदी सरकार विनिवेश पर पूरा जोर लगा रही
मोदी सरकार विनिवेश पर पूरा जोर लगा रही है। वित्त मंत्री ने ऐलान कर दिया है कि 2021-22 में सरकार विनिवेश के जरिए 1.75 लाख करोड़ रुपये की कमाई करना चाहती है. पिछले साल कोरोना की वजह से सरकार विनिवेश का लक्ष्य (2.1 लाख करोड़ रुपये) पूरा नहीं कर पाई है. पिछले साल जो कमी रह गई है, उस कमी को भी सरकार 2021-22 में पूरा करने की भरपूर कोशिश करेगी। मोदी सरकार की विनिवेश नीति पर विपक्ष लगातार हमलावर है लेकिन बजट से यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार अपनी विनिवेश की नीति को जारी रखेगी। वित्त मंत्री के ऐलान के बाद चर्चा हैं कि मोदी सरकार एलआइसी का आइपीओ लॉन्च कर सकती है। बीपीसीएल में हिस्सेदारी बेचने की सरकार तैयारी कर ही रही है, इसके अलावा दूसरी सरकारी कंपनियों में भी सरकार अपने शेयर बेच सकती है।
मुश्किल है विनिवेश के जरिए कमाने का लक्ष्य
पिछले साल विनिवेश के जरिए 2.1 लाख करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य था, लेकिन चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिए कमाई के लक्ष्य को अब तक हासिल नहीं किया जा सका है। अब चालू वित्त वर्ष में दो महीने ही बचे हैं, ऐसे में संभावना है कि विनिवेश के जरिए लक्ष्य का 20 फीसद हिस्सा ही कमाई हो पाएगी। अगर यह रकम 30-40 हजार करोड़ तक रहती है तो ये बीते पांच साल में विनिवेश से सबसे कम कमाई होगी।
वर्ष 2012 में देश में बेरोजगारी दर दो प्रतिशत थी। आज यह 9.1 प्रतिशत है। विपक्ष सबसे ज्यादा इसी को लेकर हमलावर है। हर सेक्टर में नौकरियों पर मार पड़ने के बाद यह सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। लॉकडाउन के दौरान कई लाख मजदूर अपने घरों को लौट गए जिनमें से अधिसंख्य वापस नहीं लौटे हैं। इन्हें गांवों में रोजगार देना या उनकी शहरों में नौकरियों में वापसी सरकार की एक बड़ी चुनौती होगी। कोरोना काल के आंकड़े देखें तो सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भरता पैकेज की घोषणा की। इससे साबित होता है कि संसाधन समस्या नहीं हैं यदि आपके पास इच्छाशक्ति है तो आप संसाधन जुटा सकते हैं। आम तौर से केंद्र सरकार के पास पैसे कमाने के पांच मुख्य ज़रिए होते हैं जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स, व्यक्तिगत आयकर, और एक्साइज़ ड्यूटी।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी किए गए 2018-19 की टैक्स ब्रेकअप पर एक रिपोर्ट के अनुसार 5.78 करोड़ लोगों ने अपना आयकर रिटर्न दाखिल किये थे जिनमें से लगभग 1.46 करोड़ लोगों ने टैक्स दिए। लगभग एक करोड़ लोगों ने 5-10 लाख रुपये के बीच टैक्स दिए और बाकी 46 लाख व्यक्तिगत करदाताओं ने 10 लाख रुपये से ऊपर की आय पर टैक्स दिया। लगभग 135 करोड़ लोगों के देश में वास्तव में करों का भुगतान करने वालों की संख्या इतनी नगण्य है।
