नई दिल्ली : पिछले दिनों राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने बच्चों की प्रशंसा करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने उम्मीद जतायी कि जिस तरह देश के नौनिहाल बहादुरी के अलावा खेल, समाजसेवा, इनोवेशन, कला एवं संस्कृति में रुचि लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए मिसाल बन रहे हैं, उससे देश के अन्य बच्चों-किशोरों को भी न सिर्फ प्रेरणा मिलेगी, बल्कि उनमें कुछ अलग करने का आत्मविश्वास भी आएगा। आइए जानें कुछ ऐसे ही पुरस्कृत बच्चों से उनकी कहानी एक छोटे-से आइडिया पर भी अगर सही तरीके से कार्य किया जाए, तो नतीजे उत्साहवर्धक हो सकते हैं। इसलिए हमेशा अपने एक्शन पर ध्यान देना चाहिए..। प्रधानमंत्री के ये शब्द नोएडा के चिराग भंसाली के लिए उपयुक्त कहे जा सकते हैं। नोएडा सेक्टर-40 निवासी चिराग ने कोरोना काल में चीनी एप पर भारत सरकार के प्रतिबंध के बाद स्वदेशी टेक नामक एक वेबसाइट बनाई है। नोएडा के ही सेक्टर-30 स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में 11वीं के छात्र चिराग बताते हैं कि नवाचार करने के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता है। यह एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है, जो हमें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के युग में बढ़त प्रदान करता है। नये-नये इनोवेशन पर काम करने से काफी संतुष्टि मिलती है। इनका मानना है कि किसी भी क्षेत्र में यदि आपका तरीका मनचाहा परिणाम दिलाता है, जो दूसरों के लिए भी फायदेमंद हो, तो आप इनोवेटिव माने जाते हैं। वह बताते हैं कि संवाद के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा कही गयी बातों से जिंदगी का नया फलसफा सीखने को मिला। उनके संदेश ने न केवल मनोबल बढ़ाया, बल्कि यह भी सिखाया कि इस सफलता की खुशी में खोना नहीं है। न ही पुरस्कार के साथ मिलने वाली वाहवाही को अपने ऊपर हावी होने देना है चिराग ने मात्र एक सप्ताह में स्वदेशी टेक नामक एप बनाकर तैयार किया था। उन्हें सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सíवसेस द्वारा दिल्ली में आयोजित टीसीएस आइटी विज में प्रथम पुरस्कार भी मिल चुका है। इनोवेशन से बनायी अलग पहचान : कोच्चि स्थित नेवी चिल्ड्रेन स्कूल के पांचवीं कक्षा के छात्र वीर कश्यप ने भी एक इनोवेटिव बोर्ड गेम कोरोना-युग विकसित किया है, जिसमें खिलाड़ियों को कई चुनौतीपूर्ण स्थितियों से गुजरना पड़ता है, जैसे कि क्वारंटाइन में रहने के दौरान लोगों को करना पड़ता है। वह बताते हैं, मैंने लाकडाउन के दौरान घर में उपलब्ध वस्तुओं की मदद से ही यह गेम तैयार किया था। उसे जब यूट्यूब पर अपलोड किया, तो वह तुरंत वायरल हो गया। इस गेम में बताया गया है कि कैसे कोरोना काल में खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। किस तरह से हैंड सैनिटाइजर, मास्क का प्रयोग कर शारीरिक दूरी बनाए रख सकते हैं।

राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेता एवं जम्मू के जोधामल पब्लिक स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र हरमनजोत सिंह का कहना है कि वे अक्सर महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं के समाचार सुनते रहते थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसा एप बनाया जाए, जो महिलाओं की सुरक्षा करे। इसके लिए उन्होंने कोडिंग सीखी, यूट्यूब से मदद ली, सेल्फ स्टडी की और आखिर में रक्षा वुमेन सेफ्टी एप बनाने में सफल रहे। हरमनजोत सिंह प्रधानमंत्री के विचारों से बहुत प्रभावित हैं। विशेषकर इस संदेश से कि आसमान छुओ, मगर अपनी जड़ों से जुड़े रहो। हरमनजोत सिंह की मां मनदीप कौर कहती हैं कि बेटे की कामयाबी किसी सपने जैसी है। मैं प्रधानमंत्री का धन्यवाद करना चाहती हूं। वहीं, पिता हरविंदर सिंह की मानें, तो बेटे ने खुद से ही सबकुछ सीखा और एप डेवलप किया। इसमें मां ने पूरा सहयोग दिया।
प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार से सम्मानित लखनऊ के 11 वर्षीय व्योम आहूजा खेल और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में 35 रिकॉर्ड बना चुके हैं। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में 28 बार इनका नाम दर्ज हुआ है। व्योम ने सिर्फ दो साल,चार माह की उम्र में बांसुरी वादन कर हर किसी को हैरान किया था। वे कई अन्य वाद्ययंत्र भी बजाते हैं, जिनमें माउथ ऑर्गन, सेक्सोफोन, गिटार,तबला आदि शामिल हैं। व्योम की इस विलक्षण प्रतिभा को मां दीया ईश्वर का आशीर्वाद मानते हुए कहती हैं, जैसे-जैसे व्योम बड़ा होता गया, उसके अंदर छिपी प्रतिभा सामने आती गई। हम सिर्फ उसे बेहतर से बेहतर मंच देने का प्रयास करते रहे। वैसे, व्योम वैज्ञानिक बनना चाहते हैं। वह वेद-पुराणों के ज्ञान को विज्ञान से जोड़कर आविष्कार करने की इच्छा रखते हैं। व्योम की मानें तो प्रधानमंत्री के शब्दों ने उन्हें ऊर्जा और उत्साह से भर दिया है। सीएमएस,गोमतीनगर में कक्षा सात के छात्र व्योम ने नौ साल की उम्र में बंजी जंपिंग कर एशिया के सबसे कम उम्र का खिलाड़ी बनने का खिताब भी हासिल किया है।
