नई शिक्षा नीति में भारती संस्कृति, कला, ज्ञान, धरोहर व ज्ञान परंपरा को आत्म सात करना होगा। हमारा देश कृषि प्रधान देश रहा है। नई नीति में अपने आधार को बनाए रखना होगा। यह कहना है पंतनगर के डॉ. सुनीता पांडेय का। वह ब्रज अकादमी की ओर से आयोजित वेबिनार में विचार रख रही थीं। इसी क्रम में डॉ. भास्कर मिश्र ने कहा कि प्रकृति को संरक्षित करते हुए हमें विकास की ओर अग्रसर होना है। वैदिक संस्कृति, वेद पुराण एवं महाकाव्य को भी नई शिक्षा नीति का आधार बनाना होगा। ऐसा किए बिना हम अपनी शिक्षा व्यवस्था को समृद्ध नहीं कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश सरकार में शिक्षा सलाहकार रहे डॉ. चंद्र भूषण चतुर्वेदी ने कहा कि ब्रज संस्कृति से लोगों को जोडऩा होगा। खासकर वैदिक शिक्षा के महत्व को समझाते हुए व्यावहारिक बनाना होगा। मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि प्रयाग शिक्षा की नर्सरी है। अनादि काल से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले चिंतक, साधक, एवं प्रशासक अपने वैचारिक मंथन से शिक्षा को नया आयाम दिया। अभियांत्रिकी का जन्म भी वेदों से हुआ है।आज अभियांत्रिकी शिक्षा में उद्यमिता और स्वरोजगार के अवसर को जोडऩे के लिए भी प्रकृति जनित वस्तुओं का उपयोग और उन्हेंं प्राकृतिक संरक्षण के लिए जरूरी बनाने की आवश्यकता है। दूरदर्शन के पूर्व निदेशक डॉ. रामजी मिश्रा ने कहा कि विश्व की किसी भी भाषा में धर्म का पर्याय नहीं है। धर्म और विज्ञान दोनों एक ही है। नई शिक्षा नीति प्राचीन संस्कृतियों एवं सभ्यताओं की ओर इंगित कर रही है।
