मौसम बदल रहा है। गर्मी के दिन आ रहे हैं। सुबह-शाम वसंती हवा के साथ सर्दी और दोपहर की धूप में गर्मी होने लगी है। इससे संक्रामक बीमारियां बढ़ रही हैं। खासतौर से वसंती हवा का विपरीत असर लोगों की त्वचा पर पड़ रहा है। त्वचा में रूखापन आने लगा है, इससे दाद और खुजली के मरीज बढ़ रहे हैं। कम से कम 15 दिनों तक संभलने की जरूरत है। क्योंकि सुबह शाम मौसम के अनुसार पहने जाने वाले कपड़े आपको बीमारी से बचा सकते हैं। प्रस्तुत है ‘दैनिक जागरण की यह खास रिपोर्ट
त्वचा पर होता है हवा का अटैक
वसंती मौसम में हवा का सीधे अटैक त्वचा पर होता है। त्वचा रूखी होने लगती है। स्नान के बाद यदि तेल या मॉस्चुराइजर न लगाया तो खुजली होती है। नाखून से खुजलाने पर गंदगी शरीर मेें प्रवेश करती है और वही बीमारी का रूप ले लेती है।
इन आंकड़ों पर दीजिए ध्यान
-500 लोग प्रत्येक दिन पहुंच रहे अस्पतालों की ओपीडी में
-03 गुना ज्यादा बीमार बढ़ जाते हैं इस मौसम में
-15 दिनों पहले से ज्यादा बढ़े हैं खुजली-दाद के केस
-45 साल उम्र तक के महिला व पुरुष होते हैं एलर्जी से परेशान
-05 साल तक के बच्चों को ज्यादा होती है खुजली की बीमारी
-07 दिनों तक त्वचा से हैं परेशान तो डाक्टर को जरूर दिखाएं
-15 दिन लग जाते हैं बीमारी पूरी तरह ठीक होने में
-06 गिलास पानी रोज पीने की आदत डालें
-01 गिलास संतरे का रस पीना रहेगा लाभदायक
शाम के लिए फुल बांह के कपड़े रखें
यदि आप कार्यस्थल पर जा रहे हैं तो दिन में धूप और उससे होने वाली गर्मी के अनुसार ही कपड़े पहन रहे होंगे। लेकिन, यह ध्यान रखें कि शाम ढलने पर ठंडक हो रही है। सेहत के लिए वही खतरनाक है इसलिए फुल बांह की शर्ट या स्वेटर अपने पास रखें जिसे रात में घर लौटते समय पहनें।
घरेलू इलाज की बजाए डॉक्टर को दिखाएं
अक्सर खुजली होने पर लोग देशी इलाज करते हैं। नीम का तेल, नीम की छाल, कपूर, तमाम तरह के देशी लोशन, तेल, गंधक और नमक का इस्तेमाल करते हैं। इससे कीटाणु तो मर जाते हैं लेकिन, त्वचा की उससे रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है। घरेलू इलाज में लोग सिर्फ नारियल का तेल या मास्चुराइजर का इस्तेमाल करें, ज्यादा दिनों तक खुजली है तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
