Close Menu
  • होम
  • देश-विदेश
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • फरीदाबाद
  • वायरल
  • जॉब अलर्ट
  • सेहत
  • क्राईम
  • मनोरंजन
  • संपर्क करें
Facebook WhatsApp
Facebook WhatsApp
Faridabad News24
  • होम
  • देश-विदेश
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • फरीदाबाद
  • वायरल
  • जॉब अलर्ट
  • सेहत
  • क्राईम
  • मनोरंजन
  • संपर्क करें
Facebook WhatsApp
Faridabad News24
  • होम
  • देश-विदेश
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • फरीदाबाद
  • वायरल
  • जॉब अलर्ट
  • सेहत
  • क्राईम
  • मनोरंजन
  • संपर्क करें
Home » मोदी सरकार ने भारत को आधुनिक, संपन्न व न्यायसंगत बनाने का फैसला किया है

मोदी सरकार ने भारत को आधुनिक, संपन्न व न्यायसंगत बनाने का फैसला किया है

faridabadnews24By faridabadnews24March 1, 2021No Comments4 Mins Read

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘उद्यमों के विनिवेश’ विषयक वेबिनार के उद्घाटन के दौरान दिया गया अहम बयान ‘सरकार का काम कारोबार करना नहीं है’, विनिवेश संबंधी बजट में की गई नीतिगत घोषणाओं को तेजी से मूर्तरूप देने की पहल सरीखा है। हालांकि, इस बयान के साथ ही इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई। कुछ विशेषज्ञ पक्ष में बात कर रहे हैं तो कुछ विपक्ष में। ऐसे में इस नीतिगत बयान का अर्थव्यवस्था और उसके फायदे के नजरिये से मूल्यांकन करना जरूरी हो जाता है।

इस बात पर लगभग सभी एकमत हैं कि सरकार का मूल काम सकारात्मक विधायी माहौल तैयार करना, नीतियों का समय पर क्रियान्वयन, सुशासन व जनता के हितों में निर्णय लेना है। मुक्त बाजार का मौलिक सिद्धांत है कि संस्थाओं को सामाजिक संसाधन, भूमि, श्रम व पूंजी का सीमित आवंटन किया जाए, ताकि अधिकतम मूल्य निर्धारण हो सके। शोध बताते हैं कि सार्वजनिक उद्यम औसतन अपनी क्षमता से कम नतीजे देते हैं। इसलिए, यह जरूरी हो जाता है कि उनको आवंटित संसाधनों को उन हाथों में सौंप दिया जाए जो उनका अधिकतम उपयोग करते हुए बेहतर नतीजे दे सकें। अब सवाल उठता है कि सरकार कारोबारी गतिविधियों में शामिल ही क्यों हुई? इसके लिए भारत के आर्थिक इतिहास को जानने की जरूरत है, ताकि यह समझा जा सके कि देश में सार्वजनिक उद्यमों की स्थापना क्यों की गई। ब्रिटिश शासन से पहले भारत में सभी प्रकार के कारोबार उन व्यवसायियों द्वारा किए जाते थे, जिनके पास पूंजी थी, जोखिम उठाने का साहस था और कारोबार को संचालित करने की क्षमता थी। सरकार सकारात्मक माहौल बनाने के लिए इसमें शामिल हुई, क्योंकि अंग्रेजों ने लूट-खसोट करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था और कारोबार को पूरी तरह जर्जर कर दिया था। एक समय दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में शुमार भारत गरीब देश बन चुका था। आजादी के बाद आधुनिक भारत के निर्माताओं ने जर्जर अर्थव्यवस्था में जान फूंकने की कोशिश शुरू की। अर्थव्यवस्था बड़ी पूंजी, कौशल, योग्यता और विफलता की जोखिम उठाने वाली क्षमता की मांग कर रही थी। दुर्भाग्यवश साजिश के तहत इन सभी कारकों को हमसे दूर कर दिया गया था। लौह व सीमेंट आदि उद्योगों में दीर्घकालिक पूंजी की जरूरत होती है। लौह उद्योग ऐसा क्षेत्र था जिसे पूंजी, प्रबंधन और इन सबसे ऊपर लाभ के लिए लंबे इंतजार की जरूरत थी। प्रारंभिक सफलताओं ने सरकार को ब्रेड, बल्ब और साइकिल निर्माण के क्षेत्र में दखलअंदाजी के लिए प्रेरित किया। बाद में वामपंथी ताकतों ने सरकार को कारोबार में बने रहने के लिए मजबूर कर दिया। अप्रभावी निगरानी और आर्थिक लाभ के लिए जवाबदेही का तय नहीं होने जैसे कारकों ने सार्वजनिक उद्यमों को घाटे में ला दिया। इन सार्वजनिक उद्यमों को बंद किए जाने से बेरोजगारी बढ़ती और लोग गुस्से में आ जाते। इसी आशंका में सरकारें घाटे में चल रहे उद्यमों को बेचने अथवा बंद करने जैसी कार्रवाई से बचती रहीं। ये उद्यम सरकार के वित्तीय संसाधनों को कम करते रहे, जिनके इस्तेमाल से जरूरत के अनुरूप सड़क, बंदरगाह या रेलवे नेटवर्क का निर्माण हो सकता था। एयर इंडिया इसका सटीक उदाहरण है। इन स्थितियों ने अर्थव्यवस्था के उदारीकरण, बाजारीकरण व वैश्वीकरण के लिए मजबूर कर दिया। ऐसे लोग सामने आने लगे, जिनके पास पूंजी, जोखिम उठाने की क्षमता और कारोबार के संचालन की योग्यता थी। तत्कालीन सरकार ने कुछ सार्वजनिक उद्यमों को सूचीबद्ध करते हुए अपना हिस्सा बेचने की पहल की, लेकिन मूल्यांकन आशातीत नहीं रहा। वाजपेयी सरकार के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति थी, जिन्होंने रणनीतिक विनिवेश शुरू किया और प्रत्यक्ष रूप से बिक्री भी की। इसमें सरकार को सफलता भी मिली। मारुति का उदाहरण सबके सामने है। हालांकि, बाद की सरकारें इस मुद्दे पर मौन रहीं और राष्ट्र आर्थिक पीड़ा झेलता रहा।  मोदी सरकार ने आधुनिक, संपन्न व न्यायसंगत भारत बनाने का फैसला किया है। वे ज्यादातर उन क्षेत्रों पर गौर कर रहे हैं, जिनसे अच्छे मूल्य हासिल हो सकते हैं। चाहे किराए पर देने की बात हो, विदेशी निवेश को बढ़ाना हो अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के विनिवेश की दिशा में आगे बढ़ना हो। इनमें से कुछ तो ऐसे हैं, जिनके विनिवेश के लिए दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। लेकिन, वे ऐसा करेंगे। वे भारत की बेहतरी और खासकर आर्थिक क्षेत्र में बेहतरी के लिए दृढ़संकल्पित नजर आते हैं। चाहे कुछ भी हो सरकार ने भू-राजनीति, ऊर्जा व आर्थिक सुरक्षा से जुड़े छह क्षेत्रों में सुधारों को जारी रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, उद्यमों की संख्या के सीमित रहने की उम्मीद है। इसका दोहरा प्रभाव होगा- पहला, पारंपरिक संसाधनों से इतर देश के लिए बड़ी धनराशि इकट्ठा होगी व दूसरा, भवन जैसे दूसरे आवश्यक संसाधनों और जनहित के कार्यो में आर्थिक बाधा नहीं आएगी।

faridabadnews faridabadnews24 Modi government has decided to make India modern prosperous and just.
Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on YouTube
Share. Facebook Twitter WhatsApp Email Telegram Copy Link
faridabadnews24

Related Posts

ग्रामीणों ने पकड़ा तो सर्विस पिस्टल से कर दी फायरिंग, महिला से साथ ASI का अवैध संबंध, 1 की मौत 3 घायल

November 4, 2026

टीचर ने WhatsApp ग्रुप में अश्लील वीडियो और फोटो भेजे, गर्ल्स कॉलेज में बड़ा कांड!

November 4, 2026

आखिरी नोट में सामने आई मौ’त की दर्दनाक वजह, बेटे और बेटी के साथ मां ने खत्म कर ली जीवनलीला

October 31, 2026
Leave A Reply Cancel Reply

Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • देश-विदेश
  • फरीदाबाद
  • हरियाणा
  • कारोबार
  • क्राईम
  • मनोरंजन

Company

  • Information
  • Advertising
  • Classified Ads
  • Contact Info
  • Do Not Sell Data
  • GDPR Policy

Services

  • Subscriptions
  • Customer Support
  • Bulk Packages
  • Newsletters
  • Sponsored News
  • Work With Us

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2026 ThemeSphere. Designed by CSe.
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.