
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से साइकिल पर सवार होकर भरत चौरसिया दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दरबार पहुंच रहे हैं । इस यात्रा के दौरान भरत चौरसिया,चौरसिया समाज जिसमें तंबोली,बरई,मोहबिया,कुमरावत समेत कई जातियों से संपर्क कर रहे है और पान की खेती को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में शामिल करने की गुहार लगा रहे है। दरअसल अपनी मांगों को लेकर भरत चौरसिया 2 मार्च को प्रधानमंत्री से मिलकर एक मांग पत्र भी देंगें ।

भरत चौरसिया अपनी इस यात्रा के दौरान सोमवार को फरीदाबाद पहुंचे जहां हरियाणा बीजेपी पूर्वांचल प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश संयोजक अंगद चौरसिया ने उनका जोरदार स्वागत किया और उनके हाथों में तिरंगा देकर उनका सम्मान किया। इस दौरान अंगद चौरसिया ने कहा कि चौरसिया समाज खासकर पान की खेती के लिए विख्यात है। हालांकि केंद्र सरकार ने पान की खेती को बढावा देने के लिए अनुदान भी दे रही है ताकि पान की खेती करने वाले किसान आसानी से बरेजा भी बना सकें। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण पान की खेती करने वाले किसान अब इस पेशे को छोड़ रहे हैं । ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पान की खेती को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में शामिल कर विशेष ध्यान देने की आवश्यक्ता है।
पान को सम्मान दिलाने के लिए साइकिल यात्रा पर निकले भरत चौरसिया ने एक मांग पत्र भी तैयार किया है जिसमें पान की खेती को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में शामिल करने के साथ साथ पान विकास बोर्ड की गठन करने और पान की खेती के लिए अनुदान देने की भी मांग रखी है।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में महोत्सव नगर के नाम से विख्यात महोबा जिले में दसवीं शताब्दी से पान की खेती हो रही है। चंदेल शासकों द्वारा बनाए बनवाए गए विभिन्न तालाबों के किनारे पान के बरेजा (पान की खेती को संरक्षित करने हेतु बनने वाला अस्थायी ढांचा) लगाने का हुनर हजारों चौरसिया परिवारों के पास है लेकिन अब वे पान से दूर भागते जा रहे हैं। महोबा में पान की जिस परंपरा को चंदेलों और मुगलों ने संरक्षण प्रदान किया, आजाद भारत में वह परंपरा अब विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है। दो दशक से पान की खेती कर रहे संतोष कभी एक एकड़ जमीन पर बरेजा लगाते थे लेकिन अब अकेले बरेजा लगाने का जोखिम नहीं उठाते। हालांकि आज भी हजारों परिवार पान की खेती को ही अपना मुख्य पेशा बनाया हुआ है। ऐसे में सरकार को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
पान की खेती के लिए सरकार दे रही है अनुदान
केंद्र सरकार के उद्यानिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना-रफ़्तार का क्रियान्वयन किया जा रहा है. जिसके तहत उच्च तकनीक से पान की खेती हेतु 500 वर्ग मीटर में परियोजना के प्रावधान अनुसार पान बरेजा बनाने एवं पान की खेती करने हेतु इकाई लागत राशि रूपये 1.20 लाख पर 35 प्रतिशत अनुदान राशि 0.42 लाख दिया जाता है।
अनुदान के लिए कहाँ करें आवेदन (where To Apply For Subsidy)
पान की खेती पर आवेदन अनुदान करने के लिए किसानों ऑनलाइन पंजीयन उद्यानिकी विभाग मध्यप्रदेश फार्मर्स सब्सिडी ट्रैकिंग सिस्टम https://mpfsts.mp.gov.in/mphd/#/ पर जाकर कृषक पंजीयन कर सकते हैं।
पान के फायदे।
- पान में पाया जाने वाला तरल पदार्थ भोजन को पचाने में मदद करता है, जिससे पाचन क्रिया मजबूत होती है
- पान के पत्तों का सेवन करने से खाँसी में राहत मिलती है.
- मुंह में छाले हो जाने पर पान का सेवन करने से लाभ मिलता है.
- चेहरे पर पिम्पल्स होने पर पान के पत्तों का पेस्ट लगाने से लाभ मिलता है.
- पान के पत्तों को चबाने से ओरल कैंसर की बीमारी से बचा जा सकता है.
- पान के पत्तों को पिस कर घाव पर लगाने से घाव जल्द ठीक हो जाता है.
