
Mother Emotional Post: सोशल मीडिया पर ऐसे कई पोस्ट हैं जिनमें लोग पूछ रहे हैं कि मेट्रो शहर में रहने के लिए उनकी महीने की सैलरी कम से कम कितनी होनी चाहिए. लोग अपना परिवार चलाने के लिए कम से कम 20000 रुपये या फिर उससे ज्यादा की मांग रखते हैं. हालांकि, दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में 20000 रुपये न के बराबर कहा जाता है, क्योंकि रहने के लिए किराए का मकान से लेकर, खाने-पीने, ट्रेवेलिंग में खर्च हो जाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि लाख या उससे अधिक रुपये प्रति माह मेट्रो शहर में आराम से रहने के लिए पर्याप्त है. चलिए आज हम आपको एक ऐसा किस्सा सुनाते हैं, जिसके बारे में जानकर आप भी इमोशनल हो जाएंगे.
दिल्ली में बच्चे को पालना बेहद ही मुश्किल
हर महीने की कमाई है सिर्फ इतनी
उन्होंने आगे कहा कि वह एक सिंगल मदर हैं और एक छोटे स्कूल में पढ़ाती हैं. वह कुछ बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती हैं. उनकी मासिक कमाई 18,500 रुपये है. वह उत्तर पूर्वी दिल्ली में सड़क किनारे एक इमारत में 1बीएचके ग्राउंड फ्लोर अपार्टमेंट में रहती है और किराए के रूप में 5,500 रुपये का भुगतान करती हैं. उन्होंने लिखा, “मेरा अपार्टमेंट अच्छा नहीं है लेकिन बुरा भी नहीं है.”
बच्चे की देखभाल के लिए करना होता है ऐसा
उन्हें कोई बिजली बिल नहीं देना पड़ता है क्योंकि उनका यूज शायद ही कभी 200 यूनिट से ज्यादा होता हो. उन्होंने कहा कि उनका बेटा चार साल का हो गया है और ऑटिस्टिक (माइल्ड) है. यही वजह है कि वह अच्छी तरीके से बोल नहीं पाता. वह उसे उस स्कूल में ले जाती है जहां वह खुद भी पढ़ाती है और उसके लिए उसे पेमेंट नहीं करना पड़ता. बच्चे की मां ने कहा कि वह उसे इलाज के लिए नहीं ले जा सकती क्योंकि यह काफी महंगा है लेकिन कभी-कभी, वह उसे मुफ्त भोजन या पौष्टिक नाश्ता दिलाने के लिए आंगनवाड़ी भेजती है क्योंकि फल खरीदना बेहद ही मुश्किल है.
उसने कहा कि वह महीने के अंत तक कुछ भी नहीं बचा पाती. जब वह किराए के लिए 30,000 रुपये से 35,000 रुपये का भुगतान करने वाले लोगों के बारे में पोस्ट पढ़ती है, तो वह सपने देखती है कि अगर उसकी इनकम ज्यादा होती तो वह कितनी सेविंग कर सकती थी. उसने सीखा कि आप जितना अधिक कमाते हैं, डिमांड बढ़ जाती हैं क्योंकि एक लाख से अधिक कमाने वाले लोग भी बचत नहीं कर पाते हैं.
NEWS SOURCE : indiatv
