
रोहतक: म्हारी छोरी छोरा तै कम है के… यह कहावत जिले के गांव रूड़की की बेटी मीनाक्षी हुड्डा पर पूरी तरह सटीक बैठती है। महज 13 साल की उम्र में बॉक्सिंग रिंग में कदम रखने वाली मीनाक्षी ने अपने हौसले की दमदार पंच से हर मुश्किल को मात देकर वर्ल्ड नंबर 1 बॉक्सर बनने तक का सफर तय किया है। बॉक्सिंग न्यू रैंकिंग लिस्ट के मुताबिक मीनाक्षी हुड्डा दुनिया की नंबर 1 बाक्सर बनने के साथ ही देश की पहली महिला बाक्सर खिलाड़ी बनकर इतिहास रचा है। मीनाक्षी 48 किग्रा में वर्ल्ड नबंर 1 बाक्सर बनने वाली देश की पहली खिलाड़ी बनी है। कभी आर्थिक तंगी के चलते बेटी के खेलने से हिचकिचाने वाले पिता आज उसी बेटी की सफलता पर गर्व करते हैं। मीनाक्षी ने खेल के दम पर सरकारी नौकरी हासिल की, पिता को नया आटो दिलवाया, परिवार के लिए पक्का घर बनवाया और करीब 7 लाख रुपये का कर्ज भी उतारा है।
बेटी के जुनून ने उनकी सोच बदल दी
हालांकि मीनाक्षी का सफर आसान नहीं रहा। पिता कृष्ण हुड्डा आटो चालक है और मां सुनीता गृहिणी। एक समय ऐसा था जब परिवार के पास खुद का आटो खरीदने तक के पैसे नहीं थे, तो पिता दूसरे की गाड़ी चलाकर चार बच्चों का पालन-पोषण करते थे, यहीं कारण रहा कि आर्थिक तंगी के कारण पिता शुरुआत में मीनाक्षी को खेलों में भेजने से हिचकिचाते थे, लेकिन बेटी के जुनून ने उनकी सोच बदल दी।इस सफर में कोच विजय हुड्डा का अहम योगदान रहा। जिन्होंने न केवल तकनीकी प्रशिक्षण दिया बल्कि आर्थिक मदद भी की। वहीं मां ने भैंस का दूध बेचकर बेटी के सपनों को उड़ान दी।
अंधेरे से डरने वाली बेटी बनी वर्ल्ड चैंपियन
मीनाक्षी ने करीब 8 साल की उम्र में बाक्सिंग शुरू की। घर की हालत ऐसी थी कि नए ग्लव्स तक खरीदना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने पुराने ग्लव्स से ही अभ्यास शुरू किया। मां सुनीता ने बताया कि मीनाक्षी को अंधेरे से डर लगता था। ऐसे में वह रोज सुबह 5 बजे खुद उसे स्टेडियम छोड़ने जाती और शाम को अंधेरा होने पर वापस लेकर आती थी। मीनाक्षी ने अपने गांव में ही कोच विजय हुड्डा के पास अपनी प्रतिभा को निखारने की शुरूआत की थी और अपनी मेहनत और जूनून के दम पर महज दो साल में नेशनल स्तर पर जीत हासिल कर खुद को साबित भी किया।
गोल्ड मेडल हासिल कर खुद की रैंकिंग में सुधार किया
उन्होंने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति के ऐसे हालात में खेल का सपना देखना ही मुश्किल था, लेकिन मीनाक्षी ना केवल सपना देखा, बल्कि उसे सच भी करके दिखाया। वहीं कोच विजय हुड्डा के कहा कि मीनाक्षी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह हार से टूटती नहीं, बल्कि अपनी कमियों को सुधारकर और मजबूत बनती है। इसी खूबी ने मीनाक्षी को दुनिया की नंबर 1 बाक्सर खिलाड़ी बनने में भी मदद की है। जबकि पिछले एक वर्ष तक मीनाक्षी टाप 10 की सूची तक बाहर थी, लेकिन अपनी मेहनत के दम पर मीनाक्षी ने एक वर्ष में वर्ल्ड कप में एक गोल्ड मेडल व एक सिल्वर मेडल हासिल किया। इसके साथ ही वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर खुद की रैंकिंग में सुधार किया। जबकि इससे पहले इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड बाक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, वर्ष 2022 में एशियाई चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल, ब्रिक्स खेल में गोल्ड मेडल वर्ष 2023 में एशियाई चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल सहित कई बार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीत हासिल कर चुकी है।
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