
ओशो किसी पहचान के मौहताज नहीं हैं। वे 20वीं सदी के एक प्रसिद्ध भारतीय दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु थे। उनका जन्म 11 दिसंबर 1931 को मध्य प्रदेश के कुचवाड़ा में हुआ था और उनका निधन 19 जनवरी 1990 को पुणे में हुआ। वे दर्शनशास्त्र के मेधावी छात्र थे और उन्होंने जबलपुर विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में कार्य भी किया। 1960 के दशक में उन्होंने पूरे भारत की यात्रा की और “आचार्य रजनीश” के नाम से सार्वजनिक भाषण दिए। उन्होंने ध्यान की शुरुआत की, जो आधुनिक मनुष्य के लिए था जो शांत बैठने में कठिनाई महसूस करता है। वे त्याग या सन्यास के पुराने अर्थ के विरोधी थे। उनका मानना था कि व्यक्ति संसार में रहकर भी “नया सन्यासी” बन सकता है जो जीवन का आनंद भी ले और भीतर से शांत भी रहे। उनके विचार युवाओं को हमेशा प्रेरित करते हैं। ऐसे में यहां हम उनके प्रेरक, अनमोल विचार लेकर आए हैं। यहां पढ़ें ओशो के मोटिवेशनल कोट्स।
- जो व्यक्ति अपने भीतर शांति पा लेता है, वही सच्ची खुशी का अनुभव करता है।
- जब तुम बदलते हो, तो पूरी दुनिया तुम्हारे लिए बदल जाती है।
- जो तुम्हें कमजोर बनाता है, उसे छोड़ देना ही समझदारी है।
- अंधेरे से मत लड़ो, बस दीपक जला दो, अंधेरा खुद चला जाएगा।
- जब आप सच में खुश होते हैं, तो आपको किसी कारण की जरूरत नहीं होती।
- हर अनुभव तुम्हें कुछ सिखाने आता है, उसे स्वीकार करो।
- डर हमेशा भविष्य की कल्पना से आता है, वर्तमान में कोई डर नहीं होता।
- खुद को खोजो, क्योंकि जब तुम खुद को जान लेते हो, तभी असली आनंद मिलता है।
- खुद से लड़ना बंद कर दो, यही तुम्हारी सबसे बड़ी मुक्ति है। स्वीकार करो जो तुम हो, तभी परिवर्तन संभव है।
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