
फरीदाबाद: जिला स्वास्थ्य विभाग और ईएसआइसी अस्पताल में इलाज की बजाए अक्सर मरीजों रेफर करने पर जोर दिया जाता है। इससे कई मरीजों की जान पर बन आती है तो कई दम भी तोड़ चुके हैं। ऐसे मामले पूर्व में सामने आ चुके हैं। अब ताजा मामला पांच माह की बच्ची का है। जिसका ईएसआइसी और नागरिक अस्पताल ने इलाज करने से मना कर दिया और रेफर कर दिया। दिल्ली सफदरजंग अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। स्वजन के अनुसार ईएसआइसी में बच्ची के इलाज से संबंधित पूरी सुविधा नहीं है। ज्यादा पूछने पर स्टाफ से जवाब नहीं दिया। जबकि नागरिक अस्पताल में कहा गया कि बेड खाली नहीं है। हैरानी की बात है कि केंद्र और राज्य सरकार जच्चा-बच्चा की सेवाओं पर खास ध्यान देने का दावा करती है, मगर जब स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत पड़ती है तो स्थिति कुछ अलग ही नजर आती है। याद रहे हर दिन 15 से 20 गंभीर मरीजों को नागरिक अस्पताल से सफदरजंग या एम्स के लिए रेफर किया जाता है।
एनआईटी कपड़ा कालोनी निवासी जितेंद्र यादव और बबली देवी अपनी पांच माह की बेटी को तीन नंबर ईएसआइ अस्पताल लेकर गए थे। बेटी कई दिनाें से मां का दूध नहीं पी पा रही थी। जितेंद्र यादव और बबली देवी ईएसआइ कार्डधारक हैं। बबली देवी ने लगभग पांच माह पहले दो जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया था। जन्म के थोड़ी देर बाद ही एक बेटी की मौत हो गई थी। दूसरी बेटी अब कई दिनों से मां का दूध नहीं पी रही थी। कमजाेर स्थिति को देखते हए बेटी को लेकर माता-पिता पहलेतीन नंबर ईएसआइसी अस्पताल आ गए थे। राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन की एंबुलेंस से बच्ची को सफदरजंग ले लाया जा रहाा था तो रास्ते में हो गई उसकी मौत हो गई। बता दें कि डाक्टरों और स्टाफ की लापरवाही की पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं, मगर विभाग की ओर से सुधार नहीं हो पा रहा है।
पूर्व में हुई घटनाएं
– 15 मार्च 2026 काे घायल फैज अहमद को नागरिक अस्पताल लाया गया, लेकिन कागजी कार्रवाई में देरी हुई और रेफर करते समय मौत हो गई।
– अगस्त 2025 को सरस्वती कालोनी निवासी एक व्यक्ति की नवजात की मौत हो गई थी। इसे भी रेफर किया गया था। इस मामले में अस्पताल के तीन कर्मचारियों पर मामले दर्ज हुए थे।
धरने के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात
रेफर मुक्त फरीदाबाद संघर्ष समिति ने गत वर्ष 294 दिन नागरिक अस्पताल के बाहर धरना दिया। समिति के संयोजक सतीश चोपड़ा की मांग थी कि अस्पताल से मरीजों को रेफर न किया जाए। मानकों के अनुसार स्टाफ होना चाहिए। सतीश चोपड़ा ने कहा कि कई बार रेफर के चलते मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है और मौत तक की नौबत आ जाती है। अधिकारियों को इस मामले में सुधार करना चाहिए। डाक्टरों काे हादसों से सबक लेना चाहिए।
महिलाओं और बच्चों के इलाज को गंभीरता से लेने के आदेश हैं। अगर कहीं लापरवाही बरतने की बात है तो इसकी जांच करवाई जाएगी। बिना किसी ठोस कारण से बच्ची को रेफर करना गंभीर मामला है। इसकी जांच करवाई जाएगी। – डॉ. जयंत आहूजा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
अस्पताल में हर मरीज को बेहतर इलाज दिया जा रहा है। अगर बच्ची का इलाज किए बिना कारण रेफर किया गया है तो इसकी जांच करवाई जाएगी। – डॉ. कालीदास दत्तात्रेय चव्हाण, डीन, ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज
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