
बॉलीवुड में ऐसे कलाकारों की कमी नहीं है, जिन्हें सालों-साल रिजेक्शन का सामना करना पड़ा है और इंडस्ट्री के रूखे व्यवहार से होकर गुजरना पड़ा है। खासतौर पर आउटसाइडर्स के साथ ये व्यवहार ज्यादा देखने को मिला है। कई कलाकार इस बात का खुलासा कर चुके हैं कि कैसे आउटसाइडर होने के चलते उन्हें बार-बार रिजेक्शन झेलना पड़ा। कुछ ऐसा ही विद्या बालन के साथ भी हुआ।
विद्या बालन को एक समय पर फिल्ममेकर ‘मनहूस’ समझने लगे थे और धीरे-धीरे कर उन्हें 13 प्रोजेक्ट्स से हाथ धोना पड़ा। विद्या बालन के कुछ शुरुआती प्रोजेक्ट बंद हो गए, जिसके चलते मेकर्स मानने लगे कि वह अपने साथ बदकिस्मती लेकर आई हैं और बिना उन्हें बताए उन्हें चुपचाप फिल्मों से बाहर कर दिया। इन रिजेक्शन और इंडस्ट्री के कठोर व्यवहार से एक समय ऐसा भी आया जब विद्या बालन बुरी तरह टूट गईं।
विद्या बालन ने खुद एक बार माना था कि लगातार रिजेक्शन और इंडस्ट्री के रूखे व्यवहार ने उनके आत्मविश्वास को बुरी तरह हिला दिया था और एक समय ऐसा भी था, जब वह खुद को आईने में देखने की भी हिम्मत नहीं कर पाती थीं। मगर हार मानने की जगह उन्होंने फिर खुद को खड़ा किया और उस सपने को पूरा किया, जो वह बचपन से देखती आई थीं।
विद्या बालन ने कम उम्र में ही टीवी की दुनिया में कदम रख दिया था। उनका पहला शो लोकप्रिय सिटकॉम ‘हम पांच’ था, जिसने उनके लिए मनोरंजन जगत के द्वार खोल दिए। इस सीरियल के बाद उन्हें फिल्मों में काम करने का अवसर मिला। लेकिन, उनके लिए शुरुआती रास्ता काफी कठिनाइयों भरा था। विद्या बालन को अपने करियर में एक्सेप्टेंस से ज्यादा रिजेक्शन मिले हैं।
एक इंटरव्यू में विद्या बालन ने बताया था कि इंडस्ट्री में शुरुआती दिनों में उन्हें “मनहूस” कहा जाता था, इन बातों का उन पर इतना गहरा असर हुआ था कि कई बार तो वह रात में रोते-रोते सोती थीं। उन्होंने फिल्म ‘चक्रम’ को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताते हुए खुलासा किया था कि कैसे वह एक एड शूट के लिए साउथ इंडिया गई थीं, जहां फिल्ममेकर ऑडिशन ले रहे थे। इसी दौरान उन्हें ‘चक्रम’ के लिए ऑडिशन देने को कहा गया और उनकी मां तुरंत मान गईं, क्योंकि वे मोहनलाल की बहुत बड़ी फैन थीं।
विद्या बालन के अनुसार, ऑडिशन के कुछ ही समय बाद फिल्म के डायरेक्टर ने उनसे मिलने की इच्छा जताई, जिसके बाद वो अपनी मां और बहन के साथ डायरेक्टर से मिलने गईं। उन्हें ये फिल्म मिल गई। चक्रम की शूटिंग खत्म करने के बाद जब विद्या मुंबई लौटीं, तब तक उनके इस फिल्म में कास्ट होने की खबर फैल चुकी थी। इसके बाद उनके पास फिल्मों की लाइन लग गई और उन्होंने करीब 8 फिल्में करने पर राजी हो गईं।
लेकिन, फिर मोहनलाल की ‘चक्रम’ बंद हो गई और इस फिल्म के बंद होते ही विद्या बालन ने सभी 8-9 फिल्में खो दीं। इसके बाद लोगों ने उन्हें मनहूस कहना शुरू कर दिया। फिर 2005 में विद्या बालन को ‘परिणीता’ ऑफर हुई, जिसमें उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई और उनका करियर चल निकला। वहीं 2010 विद्या बालन के करियर के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा। इस साल आईं ‘नो वन किल्ड जैसिका’ और ‘कहानी’ जैसी फिल्मों में उनके काम को खूब सराहा गया और फिर 2011 में रिलीज हुई ‘डर्टी पिक्चर’ ने उनके करियर को एक नई उड़ान दी। सिल्क स्मिता के जीवन से प्रेरित ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली पहली महिला प्रधान बॉलीवुड फिल्मों में से एक बन गई।
विद्या बालन ने अपने करियर में कई चैलेंजिंग रोल किए हैं, जिनमें से एक ‘पा’ में निभाया किरदार भी है। इस फिल्म में विद्या बालन ने खुद से 37 साल बड़े सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की मां का किरदार निभाया था। शुरुआत में उन्हें कई लोगों ने ये फिल्म न करने की सलाह दी, लेकिन विद्या अपने फैसले पर अड़ी रहीं और आखिरकार इस किरदार के लिए खूब तारीफें भी हासिल कीं।
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