
फरीदाबाद: औद्योगिक नगरी में तेजी से अवैध कालोनी काटी जा रही हैं। जिला नगर योजनाकार एन्फोर्समेंट की सख्ती व लगातार कार्रवाई के बावजूद इन पर रोक नहीं लग पा रही है। इसलिए अब विभाग की ओर से पहली बार अवैध कालोनियों का प्रचार-प्रसार करने वाले विज्ञापन करने वालों पर सख्ती बरती जाएगी। इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ा दी है। यदि किसी ने अवैध कालोनी के प्रचार-प्रसार से संबंधित विज्ञापन का वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर डाला तो उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा। विभाग की ओर से ऐसे छह लोगों को नोटिस भेज दिए हैं। सात दिन में जवाब मांगा है। जवाब संतोषजनक न होने पर इनके खिलाफ मामले दर्ज कराए जाएंगे।
बेहतर कनेक्टिविटी का दिखा रहे सपने
जिले की पड़ोसी जिलों ग्रेटर नोएडा और नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से सीधी व सुगम कनेक्टिविटी होने वाली है। फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद कनेक्टिविटी परियोजना पर भी काम शुरू होने वाला है। बाईपास पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भी चालू हो गया है। इस तरह की कनेक्टिविटी का हवाला देकर कॉलोनाइजर धड़ल्ले से अवैध कॉलोनी विकसित करने में लगे हुए हैं। इतना ही नहीं इस कनेक्टिविटी का हवाला देते हुए वीडियो बनाए जा रहे हैं। कई तरह के लुभावने दावे किए जा रहे हैं। इससे काफी लोग इनके बहकावे में आ जाते हैं और अवैध कालोनी में प्लाट खरीद लेते हैं। बाद में जब उनके मकान-दुकान तोड़े जाते हैं तो नुकसान होता है। कालोनी काटने वाले बच निकलते हैं क्योंकि दस्तावेज में उनका कहीं नाम नहीं होता।
मास्टर प्लान को खतरा
हरियाणा राज्य औद्योगिक व अवसंरचना विकास निगम (एचएसआइआइडीसी) और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) द्वारा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक बन रहे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे किनारे औद्योगिक शहर बसाने के लिए फरीदाबाद और पलवल के नौ गांव हैं। इन सभी गांव की नौ हजार एकड़ जमीन ली जानी प्रस्तावित है।
यहां औद्योगिक शहर एचएसआइआइडीसी बसाएगा। इतना ही नहीं हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण भी अपने सेक्टरों का दायरा बढ़ाने जा रहा है। इसके लिए ग्रेटर फरीदाबाद के 18 गांव की साढ़े चार हजार एकड़ जमीन ली जाएगी। इन गांव में सेक्टर-94ए, 96, 96ए, 99, 100, 101, 102, 103, 140, 141, 142 विकसित किए जाएंगे। इनमें रिहायशी के अलावा वाणिज्यिक सेक्टर भी होंगे। इनमें से अधिकतर गांव में अवैध कालोनियां काटी जा रही है। मास्टर प्लान 2031 तैयार हो चुका है। इसके तहत तय किया जा चुका है कि कहां-कहां क्या गतिविधियां होंगी। यदि कृषि योग्य भूमि पर अवैध प्लाटिंग हो जाएगी तो मास्टर प्लान की गतिविधियां प्रभावित होंगी। इस प्लान के तहत मास्टर रोड व सेक्टर रोड बनेंगी। लेकिन यदि अवैध कालोनी कट गई तो बाद में इसे हटाने में दिक्कत होगी।
यमुना की तलहटी में भी अवैध कॉलोनी
अवैध कॉलोनी में प्लॉट खरीदने वालों में जिले के ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार, दिल्ली में रहने वाले लोग भी शामिल हैं। दिल्ली के नजदीक बसंतपुर गांव में कई कालोनी काटी गई हैं। यहां पांच हजार से सात हजार रुपये प्रति वर्गगज के हिसाब से प्लाटिंग की गई थी। हजारों लोगों ने प्लाट लेकर मकान बना लिए हैं। जब भी यमुना का जलस्तर बढ़ता है तो यहां बने मकान डूब जाते हैं। पिछले दिनों इनको तोड़ने की कवायद भी शुरू हुई थी, पर राजनीतिक दखल से कार्रवाई रुक गई।
अब जिसने भी इंटरनेट मीडिया के किसी भी प्लेटफार्म पर अवैध कालोनी के संबंध में वीडियो डाला, उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा। फिलहाल सिराज, दीपक चौहान, रघुवंशी, अखिलेश, आरव प्रापर्टी सहित अन्य को नोटिस भेज दिया है। यह सभी अवैध कालोनी में प्लाट खरीदने के लिए इंटरनेट मीडिया पर प्रचार-प्रसार कर रहे थे।
– यजन चौधरी, डीटीपीई
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