
प्रयागराज। छोटे भाई की मौत पर प्रिजन वैन में सवार अली अहमद रोया। नीचे उतरने के बाद नमाज पढ़ी। जनाजे को कंधा दिया। भाई अबान को मिट्टी दी। फुफ्फी से बातचीत की। बड़े भाई उमर से गले मिला। जब प्रिजन वैन में फिर से बैठने की बारी आई तो मूंछों पर ताव देते हुए अली अहमद बोला-मैं वापस आऊंगा। चेहरे की चमक, रसूख भरे अंदाज में भाई एहजम को भरोसा दिलाया।
पुलिस अभिरक्षा में प्रिजन वैन में सवार उमर, अली को लेकर लखनऊ और झांसी के लिए रवाना हुई तो बिना नंबर की तमाम गाड़ियां भी पीछे-पीछे चलने लगी। आते समय भी कई लग्जरी कार चल रही थीं, जिसमें करीबी और समर्थक सवार थे। कसारी-मसारी कब्रिस्तान के करीब 500 मीटर दूर तक वाहनों की कतार लगी थी। कब्रितान के अंदर-बाहर मिलाकर करीब चार हजार की भीड़ मौजूद थी। करीब चार साल बाद अली और उमर पैरोल पर बाहर आए थे। कसारी-मसारी कब्रिस्तान पहले उमर पहुंचा।

कसारी मसारी कब्रिस्तान में अतीक अहमद के बेटे के जनाजे में उमड़ी भीड़।
उसके बाद अली आया। अबान का शव लाए जाने पर दोनों भाई प्रिजन वैन में बैठे रहे। बार-बार अबान को लेकर वकील, रिश्तेदारों से पूछते रहे। एंबुलेंस में शव लाया गया तो दोनों भाई बिलख पड़े। भीड़ उन तक पहुंचने के लिए उतावली थी, लेकिन सुरक्षाकर्मी तितर-बितर करते रहे। दोनों भाई को अलग-अलग प्रिजन वैन से उतारा गया तो उनके हाथों में हथकड़ी लगी थी।
