धनबाद – लोग मानते रहे हैं कि चाइनीज सामान की गारंटी नहीं होती। लेकिन, कोरोना में तो उल्टा हो रहा है। यह तो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। पहले लगा था कि चाइनीज सामान के समान ही इसका भी हश्र होगा, लेकिन ना? इसका प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। ऐसी हालत में कोयलांचल को सावधान रहना पड़ रहा है। नया खतरा यह है कि बायोमेट्रिक हाजिरी बनाने में भी संक्रमण का डर है। इसको लेकर चिकित्सकों ने एडवाइजरी भी जारी कर दी है। लेकिन, क्या करें। डर कितना भी बड़ा हो, नौकरी करने वाले को तो हाजिरी बनानी ही है। हां, सावधानी के लिए अब बायोमेट्रिक हाजिरी बनाने के साथ लोग अपना हाथ पानी से धो ले रहे हैं। बायोमेट्रिक मशीनों के पास पानी की बोतल भी रख दी गई है। लोग कह रहे हैं, कोरोना का क्या रोना, बस हाथ है धोना।
16 हाथ उखाड़ते बस दांत
बढ़ाने को तो यहां सरकार ने सबकुछ बढ़ा दिया। डॉक्टरों की संख्या बढ़ा दी। समय के साथ उनका वेतन भी बढ़ता गया मगर नहीं बढ़ी तो बस मरीजों की सुविधा। जब पीएमसीएच के दंत रोग विभाग में एक डॉक्टर होते थे, तब भी मरीजों का बस दांत ही उखाड़ा जाता था। अब डॉक्टरों की संख्या आठ होने पर भी उतना ही काम हो रहा है। एक्सपर्ट डॉक्टरों की भारी-भरकम फौज देख यहां दंत रोगों से परेशान बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंचते भी हैं लेकिन बेहतर सुविधा नहीं देख मायूस हो जाते हैं। चिकित्सकों के भी हाथ बंधे हैं। संसाधन के अभाव में कर भी क्या सकते हैं। अधिकारी बताते हैं कि यहां चिकित्सा सुविधा बढ़ाने का प्रस्ताव तो भेजा गया है लेकिन यह धरातल पर कब उतरेगा, बताना कठिन है। तब तक तो मरीजों के दांतों की टीस बरकरार रहेगी। बर्दाश्त करें।
डॉक्टर तो नहीं, शराबी मिलेंगे
अस्पताल में तो लोग डॉक्टर से ही मिलने जाते हैं लेकिन यहां नहीं। भूली के इस अस्पताल में डॉक्टर से ज्यादा शराबी-जुआरियों के मिलने की संभावना रहती है। रात के अंधेरे में सुविधाहीन अस्पताल में आखिर डॉक्टर मिलेंगे भी कैसे? अस्पताल की कुव्यवस्था से मरीज भी परिचित है। सो मरीजों की आमद भी वहां कम हो गई है। ऐसे में अंधेरे में अस्पताल के आसपास शराबी-जुआरियों की महफिल सज जाती है। इसी बहाने आसपास का माहौल गुलजार तो रहता है। वैसे, पहले ऐसा नहीं था। क्या कुछ नहीं था वहां। डॉक्टरों-कर्मियों की फौज थी। ठीक होते मरीजों की खिलखिलाहटें थीं लेकिन वक्त की मार ने सबकुछ लूट लिया। अब वहां सिर्फ वीरानी है। सौ बेड का अस्पताल छोटा होकर महज 10 का रह गया। डॉक्टर, कर्मी और मरीज भी घटते चले गए लेकिन घटती सुविधाओं को देख आसपास के शराबियों-जुआरियों की हलचल बढ़ गई है।
सरकारी पैसा है, आपका क्या
सरकार तो सुविधा देने के लिए ही होती है। अब यह आप पर है कि कैसे इसका मजे से लाभ उठाते हैं। पहले से कोई सुविधा उपलब्ध है तो भी चिंता नहीं। सरकार के पास पैसे की तो कोई कमी होती नहीं। सरकारी पैसे से उसी तरह की दूसरी नई सुविधा भी उठाई जा सकती है। अब देखिए न झरिया के इस स्वास्थ्य केंद्र को। यहां पहले से ही जलापूर्ति के लिए ठीक-ठाक प्रबंध है। डीप बोरिंग की सुविधा है। केंद्र के सभी कार्यों में इसके पानी का प्रयोग भी होता है। अब केंद्र में नया शौचालय बनाया गया है। इसके लिए अलग से डीप बोरिंग करायी गई है। होने को तो यह भी हो सकता था कि शौचालय में पहले की बोरिंग से ही पानी का कनेक्शन कर दिया जाता मगर किसी को क्या पड़ी है। सरकार का पैसा है, आपका क्या जाता है।
