प्रदेश में 11 साल बाद फिर आठवीं की बोर्ड परीक्षा शुरू करने के मामले में पेंच फंस गया है। प्रदेश सरकार ने जहां हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, मौजूदा शिक्षा सत्र से ही आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा लेने के निर्देश दिए हुए है। वहीं नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 10वीं की बोर्ड परीक्षा भी खत्म कर दी गई है। सीएम ने कहा कि प्रदेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को जस की तस लागू किया जाएगा।
शिक्षा बोर्ड अभी तक 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा लेता रहा है। आठवीं की बोर्ड परीक्षा शुरू करने और न करने पर जब तब विधानसभा में सवाल उठते रहे हैं। प्रदेश में वर्ष 2009-10 में आखिरी बार आठवीं की बोर्ड परीक्षा शुरू हुई थी। शिक्षा का अधिनियम लागू होने के बाद बोर्ड खत्म कर दिया गया। आठवीं तक कोई बच्चा फैल न करने की नीति से छात्रों में डर खत्म हो गया। नतीतजन शिक्षा स्तर में गिरावट आई और बोर्ड परीक्षा के परिणाम प्रभावित हुए।
मनोहर सरकार पीछले बजट सत्र में बिल पारीत करा लिया था। इसे सीर चढ़ाते हुए विगत 7 जुलाई को मोलिक शिक्षा निदेशक ने बोर्ड सचिव को परीक्षाएं लेने को लिखित आदेश जारी कर दिए। इसमें छात्रों को फैल न करके अनुपूरक परीक्षा ( प्रत्येक विषय में ) देने का अवसर देने संबंधी निर्देश पर असमंजस की स्थिती बन गई, जिसको लेकर बोर्ड प्रशासन ने स्पष्ठ हिदायत मांगी हुई है। बोर्ड अधिकारियों का तर्क है कि यदी बच्चों को फैल ही नहीम करना तो बोर्ड परीक्षा कराने का क्या औचित्य है। जब तक पढ़ाई में कमजोर छात्रों को फैल नहीं किया जाएगा, उनमें पढ़ाने की रूचि पैदा करना मुश्किल है।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह ने कहा कि आठवीं की बोर्ड परीक्षा पर निर्णय सरकार लेगी। हमें मौजूदा शिक्षा सत्र से ही आठवीं की बोर्ड परीक्षा लेने के लिए कहा गया है। हम तैयारी में जुटे हुए हैं। शिक्षा निदेशालय से स्पष्ट गाइडलाइन मांगी हुई है। अगर सरकार पांचवीं कक्षा के लिए बोर्ड परीक्षाओं की कहें तो हम इसके लिए भी तैयार हैं।
