पानीपत : पानीपत के गांव रसलापुर वासी मृतक का शव चार दिन से सिविल अस्पताल स्थित मोर्चरी में रखा हुआ है। मौत के अगले दिन कोरोना जांच के सैंपल लिए। तीन दिन से कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट का इंतजार था। रिपोर्ट में देरी होने से गुस्साए ग्रामीणों ने सोमवार की सुबह सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरना दिया। दोपहर में रिपोर्ट नेगेटिव मिली। पर चिकित्सकों ने तब भी पोस्टमार्टम करने से इन्कार कर दिया। मजबूरन ग्रामीणों ने शाम को दोबारा धरना दिया।

दरअसल, गांव रसलापुर निवासी जिले सिंह की तबियत खराब होने पर स्वजनों ने उन्हें 30 सितंबर की शाम खानपुर मेडिकल कालेज में भर्ती कराया था। रैपिड एंटीजन किट से लिए स्वाब सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आने पर चिकित्सकों ने मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने को कह दिया था। मरीज को उसी रात एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिले सिंह के पुत्र विकास ने दैनिक जागरण को बताया कि स्टाफ ने तीन दिन का इलाज पैकेज 75000 रुपये बताया। दो अक्टूबर तक 1.33 लाख रुपये जमा करा लिए। उसी दिन शाम को मरीज की मौत हो गई। मौत के बाद भी 60 हजार रुपये जमा कराए। मृत्यु का कारण कोरोना के लक्षण बताए गए थे। स्वजनों ने अंतिम संस्कार कराने से इन्कार करते हुए, निजी अस्पताल के स्टाफ के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी थी। उसी दिन से शव मोर्चरी में रखा हुआ है। हंगामे के बाद सिविल सर्जन डा. संतलाल वर्मा ने मंगलवार की सुबह 10 बजे पोस्टमार्टम कराने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया है। डा. वर्मा ने कहा कि चार चिकित्सकों की टीम मृतक का पोस्टमार्टम करेगी।
स्वजनों की मांग
विकास ने कहा कि खानपुर मेडिकल कालेज में उसके पिता के स्वाब सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। निजी अस्पताल में उन्हें कोरोना संक्रमितों के साथ रखा गया। मौत का कारण भी कोरोना बताया गया था। सोमवार को मिली दूसरी रिपोर्ट भी नेगेटिव है। मौत का असली कारण क्या है, इसका पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
भोजन भी गले से नहीं उतर रहा
विकास ने सिविल अस्पताल के चिकित्सकों-अधिकारियों पर भी सही बर्ताव नहीं करने, चक्कर कटवाने का आरोप लगाया है। उसने बताया कि पिता की दो अक्टूबर को मौत हुई, अंतिम संस्कार नहीं हुआ। ऐसे में स्वजनों के गले से भोजन भी नहीं उतर रहा है। पड़ोसी भी दुखी और परेशान है।
