वाराणसी : बदलते मौसम में कोहरे के दौरान सांस और दिल के मरीज अपने को पूरी तरह से ठंड से बचाएं। कोहरे के समय हवा में सल्फर डाइआक्साइड, नाइट्रस आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड के ड्रापलेट्स (बूंदें) हवा में तैरते रहते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित होते हैं। यह कहना है कबीर चौरा स्थित एसएसपीजी मंडलीय चिकित्सालय के वरिष्ठ परामर्शदाता एवं चेस्ट फिजीशियन डॉ. आरके शर्मा का।
बताया ठंड में जरा सी लापरवाही बरतने पर बुखार की भी समस्या हो जाती है। बुखार आना इस बात का संकेत है कि हमारा शरीर किसी न किसी संक्रमण से लड़ रहा है। इस मौसम में यदि बुखार आ रहा है तो इसे कोरोना संक्रमण का ही लक्षण मानकर घबराने के बजाय चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। डा. शर्मा ने बताया कि जब कोहरा पड़ता है तो पानी के साथ विषाक्त गैसें, ड्रापलेट्स में घुल जाती हैं और ड्रापलेट्स में विषाक्त गैस घुलने के बाद उसकी प्रकृति एसिडिक हो जाती है। सांस के माध्यम से यही ड्रॉपलेट्स फेफड़े में जाकर सूजन पैदा करते हैं जिससे सांस के मरीज परेशान हो जाते हैं।मौसम बदलने के साथ ही मौसमी बीमारियों के प्रसार में भी तेजी आ जाती है। इन दिनों ठंड के समय में वायरल बुखार, खांसी और जुकाम से काफी संख्या में लोग पीड़ित हो रहे हैं। वायरल बुखार भी अमूमन सांस के सिस्टम को प्रभावित करता है जिससे मरीज को समस्या हो जाती है और सांस फूलने लगती है। शरीर के अंदर आक्सीजन की कमी हो जाती है। बहुत कम लोग ऐसे होंगे जिन्हें पिछले कुछ समय में बुखार न आया हो। बुखार आना हमारे स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे सामान्य समस्याओं में से एक है, शरीर का तापमान बढ़ने के कई कारण हैं, इसमें इम्युनिटी का कमजोर होना, अधिक श्रम करना, मौसम में बदलाव या कोई और संक्रमण हो सकता है। अगर इस मौसम में शरीर का तापमान 100 डिग्री फारेनहाइट या इससे अधिक है और तीन दिन से अधिक समय से बुखार का आ रहा है तो शरीर में किसी संक्रमण का संकेत हो सकता है। यदि आप श्वसनतन्त्र से संबन्धित किसी भी रोग से ग्रसित हैं तो सतर्क रहने की जरूरत है। इस मौसम में आमतौर पर अस्थमा, ब्रांकाइटिस और मौसमी एलर्जी के रोगियों की समस्या बढ़ जाती है। बुजुर्ग व उम्रदराज लोगों तथा गंभीर रोगों जैसे हाइपरटेंशन और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को चाहिए कि वह समय पर अपनी दवाएं लेते रहें, ब्लड प्रेसर नियंत्रित रखें और समय –समय पर चिकित्सक की सलाह भी लेते रहें। लापरवाही करने और दवा न खाने से ब्लड प्रेसर अचानक बढ़ जाता है जिससे ब्रेन हैमरेज और हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है। ज्यादा नमक, चिकनाईयुक्त खान-पान और तले-भुने खाद्य पदार्थ खाने से परहेज करें। यदि लंबे समय से डायबिटीज़ से पीड़ित हैं तो अपना शुगर लेवल जांचते रहें और खान-पान में किसी तरह कि गड़बड़ी न करें। बदलता मौसम और बढ़ी ठंड तरह-तरह के संक्रमण का कारण बन रही है। ऐसे में यदि खान-पान और दिनचर्या में गड़बड़ी हुई तो खांसी, बुखार और जुकाम का होना तय है। किसी भी संक्रमण से बचने का उपाय है अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बरकरार रखना। इसके लिए मौसमी फल, गर्म तासीर के खाद्य, सूप आदि को डाइट का हिस्सा जरूर बनायें।
यह भी है जरूरी
-गुनगुना पानी पियें।
-सुबह-शाम भाप लें।
-नींबू, संतरा तथा आंवला आदि का सेवन करें।
-यदि घर के किसी सदस्य को जुकाम या बुखार है तो उससे दूरी बनाकर रखें।
