जींद : भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कंडेला में आयोजित किसान महापंचायत में कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि राजा जब डरता है, तो किलेबंदी करता है। दिल्ली बार्डर पर किसानों से डर कर सरकार किलेबंदी कर रही है। बार्डर पर तारबंदी की जा रही है और कीलें गाड़ी गईं। लेकिन इससे किसान पीछे नहीं हटेंगे। किसानों की मांग तीनों कृषि कानून वापसी की है। अगर बात गद्दी वापसी पर आ गई, तो सरकार क्या करेगी।

तीनों कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी का कानून बनाने की मांग
तीन कृषि कानूनों के विरोध में कंडेला खाप प्रधान टेकराम कंडेला की अध्यक्षता में हुई इस खाप महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के 50 से ज्यादा खापों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। टिकैत ने किसानों से शांतिपूर्वक आंदोलन चलाने का आह्वान किया। टिकैत ने शांतिपूर्वक आंदोलन करने का आह्वान करते हुए कहा कि जब तक तीनों कृषि कानून सरकार वापस नहीं ले लेती और एमएसपी की गारंटी नहीं देती, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अभी दिल्ली कूच ना करें। स्टैंड बाई के तौर पर तैयार रहें। राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया कि सरकार से बातचीत के लिए जो 40 किसानों की कमेटी बनाई गई है, उसके सदस्य नहीं बदले जाएंगे। कमेटी भी वही रहेगी और इसके सदस्य भी वही रहेंगे। महापंचायत में तीन कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी का कानून के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से सरकार से बातचीत के लिए गठित किसानों की कमेटी के साथ बातचीत करने की मांग की गई। महापंचायत को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, दूसरी भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन सिंह मान, सरदार बलबीर राजेवाल, युद्धवीर सिंह ने भी संबोधित किया। राकेश टिकैत कंडेला के बाद खटकड़ टोल प्लाजा पर चल रहे धरने पर पहुंचे। राकेश टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर साजिश के तहत अपमानित करने का काम किया गया। उससे किसानों में गुस्सा था। इसलिए उन्होंने पानी मांगा। पानी की तासीर ठंडी होती है। जो गुस्से को ठंडा कर देता है। उन्होंने उस रात पानी की जगह आग मांगी होती, तो क्या होता।
राकेश टिकैत ने का कि युद्ध में कभी घोड़े नहीं बदले जाते। सरकार से बातचीत के लिए जो 40 किसानों की कमेटी बनाई गई है, उसके सदस्य नहीं बदले जाएंगे। कमेटी भी वही रहेगी और इसके सदस्य भी वही रहेंगे।
कंडेला में हुई खापों की महापंचायत, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, पंजाब, राजस्थान से पहुंचे हजारों लोग
महापंचायत में हरियाणा की विभिन्न खापों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। वहीं पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली से खाप और किसान संगठनों के नेता भी पहुंचे और दिल्ली से महापंचायत में पहुंचे भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत को सम्मानित किया गया। लोग सुबह 11 बजे से ही राकेश टिकैत के आने के इंतजार में जींद-चंडीगढ़ मार्ग के किनारे खड़े हुए दिखाई दिए। महापंचायत को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने मंच से किसानों पर फूल बरसाते हुए उनमें जोश भरा।
कंडेला खाप प्रधान टेकराम कंडेला ने कहा कि 28 जनवरी को गाजीपुर बार्डर पर पुलिस धरना उठवा रही थी और राकेश टिकैत के आंखों में आंसू देखे, तो कंडेला के लोगों ने रात को ही जींद-चंडीगढ़ मार्ग जाम कर दिल्ली की तरफ कूच कर दिया था। इसके बाद हर जगह से किसान दिल्ली बार्डर की तरफ कूच करने लगे। कंडेला खाप तन-मन-धन से किसानों के आंदोलन में साथ है। इसलिए खापों की महापंचायत बुलाई गई।
उन्होंने कहा कि किसान विरोधी ये कानून स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सरकार इन कानूनों को वापस लेकर एमएसपी का कानून लेकर आए। 26 जनवरी को लाल किले पर जाकर अपमानित करने वाले शरारती तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। किसानों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएं। गिरफ्तार किए किसानों को रिहा किया जाए और ट्रैक्टर-ट्राली छोड़े जाएं।
किसान की घर वापसी तब ही होगी, जब तीनों कानून केंद्र सरकार रद करेगी
उचाना। कंडेला के बाद खटकड़ टोल प्लाजा धरने पर पहुंचे भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बांगर से हुंकार भरते हुए साफ कहा कि किसान की घर वापसी तब ही होगी। जब तीनों कानून को केंद्र सरकार रद करेगी। किसान आंदोलन को हर वर्ग का भरपूर समर्थन मिल रहा है। लेकिन सरकार ने किसानों के आंदोलन को तोडऩे के लिए किसान के रास्तों में कीलें गाडऩे का काम किया है। सरकार को यह नहीं पता कि किसान ने हमेशा अपनी राहों में आए कांटों को उखाड़ फेंका है। कार्यक्रम आयोजनों ने खेती का प्रतीक हल, पगड़ी पहना कर राकेश टिकैत का स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब बड़े भाई की भूमिका में अपना कार्य करेगा। हरियाणा और यूपी पंजाब के पीछे खड़े रहेंगे।
