
सफाई व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी स्मार्ट सिटी केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी स्वच्छता सर्वेक्षण के रिजल्ट में देश में 381वें पायदान पर रहा। इतना ही नही, फरीदाबाद दिल्ली-एनसीआर के शहरों में भी सबसे गंदा है। शर्मनाक स्थिति यह है कि प्रदेश के 20 शहरों में भी अपने शहर को 19वां स्थान मिला है। सफाई को लेकर नगर निगम की अनदेखी को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
पिछले साल के मुकाबले हुए हालत बदतर गत वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में फरीदाबाद को 36वीं रैंक मिली थी। इस साल रैंकिंग गिरकर 381 पहुंच गई। यानी सीधे 345 रैंक की गिरावट दर्ज की गई। 446 शहरों की इस रैंकिंग में 381वां नंबर आना, यह दर्शाता है कि शहर में सफाई के क्या इंतजाम होंगे? सफाई के नाम पर सिर्फ करोड़ों रुपये के बिल बनाकर उनका भुगतान किया जा रहा है, जबकि काम कुछ नहीं हो रहा। शहर में न तो घर-घर से कूड़ा उठ रहा है, न ही सार्वजनिक शौचालयों की सफाई हो रही है। रिहायशी इलाकों से लेकर शहर के बाजार भी पूरी तरह साफ नहीं हैं। कूड़े का निस्तारण करने में भी शहर काफी पीछे है। बंधवाड़ी कूड़ा निस्तारण सयंत्र में कूड़े का निस्तारण कर बिजली बनाने का भी काम शुरू नहीं हो सका है। सफाई के लिए तय मानकों पर काम न होने से शहर की रैंकिंग में भारी गिरावट दर्ज की गई।
पलवल से भी पीछे रहा अपना शहर
एनसीआर के साथ-साथ स्मार्ट सिटी अपने पड़ोसी जिले पलवल से भी फिसड्डी रहा। पलवल को सर्वेक्षण में 266वीं रैंक मिली है। जबकि, प्रदेश में 13वें नंबर पर रहा है। फरीदाबाद प्रदेश में 19वें नंबर पर है।
अभी और सुधार की जरूरत
पूर्व संयुक्त आयुक्त रवि सिंगला ने बताया कि एक महीने से सफाई में काफी सुधार हुआ है, लेकिन इसमें ज्यादा काम करने की जरूरत है। लोगों को भी शहर को साफ करने के लिए नगर निगम का सहयोग करना चाहिए। खुले में गन्दगी नही डालनी चाहिए।
नगर निगम में स्वच्छ भारत मिशन के नोडल अधिकारी पदम भूषण ने कहा, ‘स्वच्छता रैंकिंग चिंताजनक है। इसमें सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे। कहां कमी रह गई, इसकी समीक्षा की जाएगी।’
रैंकिंग गिरने के ये कारण रहे
● सार्वजनिक शौचालयों की सफाई को लेकर उदासीनता
● घर-घर से कूड़ा उठाने वाले कर्मचारियों की हड़ताल
● पॉलीथीन की रोकथाम नहीं कर रहा नगर निगम प्रशासन
● कूड़े को अलग-अलग कर पहुंचा पा रहा
● अवैध कूड़ा केंद्रों ने शहर में बढ़ाई गदंगी
तीन हजार से अधिक सफाईकर्मी
स्मार्ट सिटी को साफ रखने के लिए नगर निगम सालाना करीब 150 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। निगम में करीब 3,200 सफाई कर्मचारी हैं। इन पर शहर की सफाई की जिम्मेदारी है। वहीं, चीन की कंपनी ईको ग्रीन को भी घर-घर से कूड़ा उठाने से लेकर निस्तारण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निगम सूत्रों के मुताबिक ईको ग्रीन को सालाना करीब 20 करोड़ रुपए दिए जाते हैं। निगम के सफाई कर्मचारियों के वेतन पर सालाना करीब 120 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।
आरडब्ल्यूए में नाराजगी
कन्फरडेशन ऑफ आरडब्ल्यूए के प्रधान एनके गर्ग ने बताया कि शहर में सफाई की बदहाल स्थिति है। दिवाली पर भी शहर में कूड़े के ढेर लगे रहे थे। अब स्वच्छता सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल से शिकायत करने पर कुछ सुधार हो सका है। आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों की शिकायत पर नगर निगम प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है। मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन ऑफ फरीदाबाद के पूर्व प्रधान अजय जुनेजा ने बताया कि शहर में जगह-जगह गंदगी है। पॉलीथीन गंदगी का बड़ा कारण हैं। शहर सिर्फ नाम का ही स्मार्ट सिटी है। शहर को स्वच्छ करने के लिए नगर निगम प्रशासन को लोगों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर अभियान चलाए जाने की जरूरत है।
NEWS SOURCE : livehindustan
