
बल्लभगढ़: गांव छायंसा स्थित श्री अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में दो साल बाद भी गम्भीर मरीजों को किसी प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। न तो एमरजेंसी में मरीजों का ईलाज हो पा रहा है और न नहीं कॉलेज के वार्ड में मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। ओपीडी के नाम पर कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन मात्र 10-12 मरीज पहुुंच रहे हैं। जबकि कॉलेज में 200 छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे है।
कोरोनाकाल में शुरू हुआ था कॉलेज
उपरोक्त कॉलेज का शुभारम्भ 2021 में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में मरीजों को भर्ती करने के लिए किया गया रहा। इसके बाद वर्ष 2022-23 में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए 100 छात्रों का दाखिला हुआ और उसके बाद दूसरे सत्र में 100 और विद्यार्थियों का कॉलेज में दाखिला हो गया। इस दौरान कॉलेज के तत्कालीन निदेशक गौतम गोले ने दावा किया था कि कॉलेज में 476 बैड होंगे। वर्ष 2023 में 100 बिस्तर का अस्पताल अवश्य शुरू हो जाएगा। इतना ही नहीं बार-बार प्रबंधन द्वारा यही दावा किया कि ग्रामीणों के लिए ओपीडी की अच्छी सुविधा शुरू होगी। इसके अलावा यही भी दावा कि एक्सरे, अल्ट्रासाउड सहित अन्य प्रकार की लैब आदि भी जल्द ही सुविधा शुरू होगी, लेकिन सभी दावों में से एक भी दावा आज तक सिरे नहीं चढ़ पाया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलेज में ओपीडी के अलावा कुछ भी सुविधा नहीं है। ओपीडी को भी जूनियर डॉक्टर के हवाले किया हुआ है। मरीजों का दावा है कि उन्हें दवाईयां भी पूरी नहीं मिल पा रही है। छायंसा गांव सहित आसपास के गांवों के लोेगों का कहना है कि एमरजेंसी की सुविधा कॉलेज में नहीं होने के कारण उन्हें बी.के अस्पताल व निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। मरीज भर्ती के लिए भी ग्रामीणों को बी.के अस्पताल या फिर दिल्ली के सरकारी तथा फरीदाबाद के निजी अस्पताल में जाना पड़ता है। इस तरह से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कॉलेज में ओपीडी, वार्ड में मरीज भर्ती करने के नाम पर निदेशक बी.एम.वशिष्ठ ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
इन गांवों के मरीजों को ज्यादा हो रही है परेशानी
गांव अटाली, गढखेड़ा, मौजपुर, मोहना, मोटूका, मंझावली,फज्जुपुर, कौराली, चांदपुर, मेहम्मदपुर और नरियाला।
अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर सहित अन्य प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराने का मुद्दा दो बार विधानसभा में उठाया गया। इस कॉलेज से तिगांव, पृथला व पलवल तथा यूपी के गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ होगा, लेकिन जब सुविधा नहीं होगी तो कुछ नहीं मिलेगा। विधायक ने कहा कि जब तक कॉलेज में मरीज भर्ती नहीं होंगे तो एमबीबीएस की पढाई कर रहे हैं छात्रों को भी परेशानी होगी। इसलिए मरीज की भर्ती की सुविधा सबसे पहले होनी चाहिए। इसके लिए वह फिर आवाज उठाएंगे।
– नयनपाल रावत, विधायक, पृथला विधानसभा क्षेत्र
अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी केवल नाम मात्र के लिए है। ईलाज के लिए मरीजों को निजी अस्पताल या फिर बी.के अस्पताल जाना पड़ता है।
– रणजीत, मोहना पूर्व सरपंच
मेडिकल कॉलेज में ओपीडी की सुविधा तो मिल रही है, लेकिन वह मात्र दिखावा है। ग्रामीणोंं को 20 किलोमीटर तक ईलाज के लिए जाना पड़ता है।
– प्रहलाद सिंह, अटाली पूर्व सरपंच
मेडिकल कॉलेज में वार्ड होना जरूरी है। मरीजों को गंभीर बीमारी के लिए निजी अस्पतालों में भर्ती होना पड़ रहा है।
– राकेश, मंझावली पूर्व सरपंच,
NEWS SOURCE : livehindustan
