मानव जीवन प्रकृति पर निर्भर है ।प्रकृति से मिलने वाली पाँच तत्व जिससे हमारा शरीर भी है हवा,जल,अग्नि,धरती आकाश ये ऐसे तत्व है जिसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है।जिस तरह मनुष्य का शरीर पाँच तत्वों से बना है।ठीक उसी प्रकार हमारी प्रकृति भी हमहीं से बनी और हमारे लिए ही बनी है।
जिसकी देखरेख और उसके विकास की जिम्मेदारी भी हमारी ही है।हमारे पूर्वज हमें एक अमूल्य उपहार प्रकृति के रूप में देकर हमें गये हैं जो आज हमपर रूष्ठ है।आखिर क्यों न हो?
हमने उसके साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया है।विकास की अंधी रफ्तार ने प्रकृति का दोहन हमेशा किया।अंधाधुंध पेड़ काँटे गये।पहाड़िया तोडी गयीं,नदी को बाँधा गया ये सभी कार्य ने प्रकृति की दिशा को बदलकर रख दिया और ब्रेक लगा दी प्राकृतिक चक्रो पर।यहीं से उत्पन्न हुआ हमारी विनाशलीला कभी बाढ़, सूखा़,भूकंप,आँधी के रूप में प्रकृति के द्वारा विनाश ताण्डल जारी है।जो अब विकट परिस्थति में पहुँच गया है।जिसका प्रमाण हमें ग्लेशियर का तेजी से पिघलना,भूजल स्तर का दूर होना,हवा का प्रदूषित होना,समय चक्रों का अनायास बदलना आदि से मिलता है।
आज विश्व के बड़े बड़े शहर की हवा प्रदूषित है पीने का जल प्रदूषित है और तो और खाने वाले फल सब्जी भी बढ़ते रासायनिक प्रयोगो से दूषित है।जिसके कारण कई जान लेवा रोग से हमें लड़ना पड़ता है।एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे बीमारी 10 में से 8 प्रदूषित जल अथवा हवा या और किसी प्रदूषित वस्तु के इन्फेक्शन के कारण होते हैं यह आँकड़ा वेहद चौकाने वाला और डरावना है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कईबार बढते प्रदूषण को लेकर गहरी चिंता जताई तथा सभी को इसके स्तर में सुधार के प्रयासो पर जोर देने की अपील की है।विभिन्न देश की सरकारो ने भी पर्यावरण सुधार के प्रयास बड़े पैमाने पर किये है ।जगह जगह रोड किनारे, रेलवे किनारे अनेक वृक्षारोपन कार्यक्रमों द्वारा पेड़ लगाये जा रहे है। हरित क्रांति पर जोर दिया जाने लगा है यह एक शुभ संकेत है ।
हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस ( World Environment Day (WED)) मनाया जाता है।यह दिन पर्यावरण के ज्वलंत मुद्दों के बारे में आम लोगों को जागरूक करने और इस दिशा में उचित कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (United Nations) का प्रमुख साधन है।
देखा जाए तो ये दिन हमारे भविष्य के बारे में है। अगर हमारा पर्यावरण नहीं बचेगा तो हम भी नहीं बचेंगे। इसलिए Earth Day के साथ-साथ यह दिन बाकी सभी दिनों से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है,क्योंकि बाकी दिन तभी मनाये जा सकते हैं जब उन्हें मनाने के लिए हम बचे रहें और विश्व पर्यावरण दिवस हमे बचाने की दिशा में एक बेहद ज़रूरी कदम है। हर साल विश्व पर्यावरण दिवस किसी न किसी थीम को लेकर मनाया जाता है और 2020 की theme है
“जैव विविधता”
प्रकृति जीवन का अनमोल तोहफ़ा है जो न सिर्फ एक है अपितु उसमें कई चीजें समावेशित हैं जिनके बिना हम जीना तो छोड़ो जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते |प्रकृति से ही हमें कई प्राकृतिक संसाधन मिले है जिनसे न सिर्फ मानव जाति वरन जीव-जन्तु पशु-पक्षी सभी लाभप्रद होते हैं |
आज अपने निजी स्वार्थ में अंधा होकर मनुष्य पेड़ कटवा देता है जो हमें प्राणवायु ऑक्सीजन देते हैं जो हमारे जीने के लिए बेहद ज़रूरी होती है |आज सबसे ज्यादा ज़रूरत प्रकृति को बचाने की है ,आज इंसान नदियों में ही गंदगी फैला रहा है | उसी में फैक्ट्री और घरों से निकलने वाला कूड़ा-करकट डाल रहा है जिसके कारण नदी का पानी जो पहले कभी वरदान हुआ करता था आज विषैला हो गया है |
प्रकृति के हम अंग होकर भी प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं |सिर्फ थोड़ा योगदान अगर मनुष्य करे जैसे वृक्षारोपण करना ,वर्षा का जल संरक्षण और पशु-पक्षियों के प्रति थोड़ा दया भाव उनके लिए पानी और भोजन क्या इतना करना भी मनुष्य के लिए दुष्कर है | खिले हुए पुष्प हमें मुस्कुराना सिखाते हैं अपनी महक और खिलखिलाहट से उदास चेहरों को भी प्रफुल्लित कर देते हैं |उन पुष्पों के नन्हें नन्हें पौधों को हमें लगाना चाहिए |
अपने अपने घरों में घरेलू आवश्यकता से ज्यादा पानी खर्च करते हैं जो बड़ा ही दुख का विषय है | हमको पानी का महत्व भी समझना होगा पानी हमारे लिए किसी अमृत से कम नहीं होता | आओ प्रण लें प्रकृति को बचाएँगे धरती को स्वर्ग बनाएँगे|
