दिल्ली : दिल्ली दंगों में दायर आरोपपत्र में दावा किया गया है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़कें दंगों में हेड कांस्टेबल रतन लाल की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो गई थी। जबकि 105 पुलिसकर्मी गंभीर रुप से जख्मी हुए थे। इस मामले में 24 फरवरी को हेड कांस्टेबल रतन लाल पर भीड़ द्वारा हमला किया गया था, पुलिस ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के दौरान पुलिसकर्मी पर यह पहला हमला था। उस समय हेड कांस्टेबल रतन लाल नागरिकता कानून संशोधन (सीएए) के विरोध में मुस्तफाबाद में चल रहे प्रदर्शन की ड्यूटी पर थे।

वहीं, आरोपपत्र में यह अहम खुलासा भी किया गया कि वैसे तो इन दंगों में चिकित्सीय जांच रिपोर्ट के आधार पर 500 से अधिक पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे। लेकिन लेकिन गंभीर रुप से 105 पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे। इनमें शाहदारा के पुलिस उपायुक्त व गोकुलपुरी इलाके के सहायक पुलिस आयुक्त भी शामिल थे। इसके अलावा इंटेलिजेंस ब्यूरों के एक अधिकारी अंकित शर्मा की भी दंगों में हत्या कर दी गई थी। हालांकि कुल मौते 53 हुईं। परन्तु जख्मी लोगों की संख्या बहुत ज्यादा थी।
आरोपपत्र में कहा गया है कि दंगों की भयावहता इतनी अधिक थी कि अन्य जिलों से भी पुलिस बल को बुलाना पड़ा। चार गुना पुलिसबल बढ़ाने पर भी दंगाइयों को बस में कर पाना मुश्किल रहा।
78 हजार पुलिसकर्मियों की हुई तैनाती
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा कड़कड़डूमा अदालत में दायर आरोपपत्र में कहा गया है कि दंगाग्रस्त इलाकों में शांति कायम करने के लिए 78 हजार पुलिस बल की तैनाती की गई थी। आरोपपत्र में यह भी कहा गया कि दिसंबर 2019 में भड़के साम्प्रदायिक दंगों में 100 पुलिसकर्मी व 41 सामान्य नागरिक जख्मी हुए थे। जबकि फरवरी 2020 में हुए दंगों में 108 पुलिसकर्मी और 400 सामान्य नागरिक जख्मी हुए। जिनमें से 53 की मौत हो गई।
दंगों के 24 घंटे पहले प्रदर्शनकारियों ने कर ली थी तैयारी
आरोपपत्र में कहा गया है कि दंगें शुरु होने से 24 घंटे पहले सीएए का विराेध प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने मौजपुर चौक पर पुलिसकर्मियों पर हमला किया। इस हमले में पुलिसकर्मियों को मामूली चोट जबकि दो स्थानीय नागरिक गंभीर रुप से जख्मी हुए थे।
वेलकम थाने को गई पहली सूचना
23 फरवरी की शाम पांच बजकर 23 मिनट पर सबसे पहले वेलकम पुलिस स्टेशन को दंगों को लेकर कॉल आई। पीसीआर कॉल भी उसी समय की गई। इस कॉल में बताया गया कि दो सौ-तीन सौ दंगाई मौजपुर स्टेशन पर पथराव कर रहे हैं। पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद दंगाइयों ने पुलिस पर पथराव शुरु कर दिया। इसमें पांच पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। आरोपपत्र में कहा गया है कि यह पहला मौका था जब पुलिसकर्मी किसी दंगे में इतनी बड़ी संख्या में जख्मी हुए। पुलिसकर्मियों ने भी दंगों की आंच को झेला।
विजयपार्क पर पुलिसकर्मियों पर दूसरी बार हमला बोला गया
आरोपपत्र में कहा गया कि उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों दूसरा हमला भी पुलिसबल पर बोला गया। 23 फरवरी को लगभग 6.40 बजे इंस्पेक्टर रोहताश कुमार अन्य पुलिसकर्मियों के साथ के साथ विजय पार्क मुख्य सड़क पर मौजूद थे, जब शमशान घाट पुलिया की तरफ से कबीर नगर में दंगाइयों ने पुलिस पार्टी पर भारी पथराव शुरू कर दिया। इंस्पेक्टर रोहताश और हेड कांस्टेबल विक्रात इस हमले में जख्मी हुए। नागरिकता संशोधंन कानून समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।
