नई दिल्ली जेएनयू के नॉर्थ गेट पर एबीवीपी और अंबेडकर विचार मंच, विवेकानंद विचार मंच पदयात्रा का आयोजन किया है। इस दौरान पदयात्रा में शामिल छात्रों ने कहा कि यह साल 2020 में हुए कथित संघर्ष के एक साल पूरे होने पर निकाला गया विरोध मार्च है। बता दें कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हुए बवाल के मामले में क्राइम ब्रांच की जांच अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। पिछले साल पांच जनवरी को ही 2020 के नए सेमेस्टर के लिए आनलाइन पंजीकरण करने की प्रक्रिया को बाधित करने को लेकर वामपंथी छात्र संगठनों व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के समर्थकों के बीच मारपीट हुई थी।

क्या हुआ था इस दौरान
इस दौरान वामपंथी संगठनों के समर्थकों ने जेएनयू में तोड़फोड़ भी की थी, जिससे दोनों पक्षों की शिकायत पर पहले वसंतकुंज उत्तरी थाने में अज्ञात विद्यार्थियों व अन्य के खिलाफ दंगा करने व सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में दो केस दर्ज किए गए थे। बाद में मामले को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उक्त मामले में आरोपपत्र तैयार किया जाना बाकी है। आरोपपत्र तैयार करने के बाद बिना आरोपितों की गिरफ्तारी के ही पुलिस ने आरोपपत्र दायर करने का निर्णय किया है। पुलिस ने उक्त मामले में पहले स्वत: संज्ञान लेते हुए एक मुकदमा दर्ज किया था। बाद में दोनों संगठनों की ओर से शिकायत आने पर दो केस दर्ज कर लिए गए थे।
दोनों गुटों के 34 विद्यार्थी हुए थे घायल
मारपीट में दोनों गुटों के 34 विद्यार्थी घायल हुए थे, जिन्हें उपचार के लिए एम्स ट्रामा सेंटर व सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सभी को मामूली चोटें लगी थीं, जिस कारण घटना के अगले दिन ही सभी घायलों को छुट्टी दे दी गई थी। जेएनयू में पंजीकरण प्रक्रिया बाधित करने को लेकर दो जनवरी से दोनों छात्र संगठनों के बीच विवाद हो रहा था। पांच दिसंबर की दोपहर दोनों गुटों में जमकर मारपीट हुई। पहले वामपंथी समर्थकों ने एबीवीपी समर्थक छात्रों को पीटा बाद में प्रतिशोध में एबीवीपी समर्थकों ने वामपंथी समर्थकों को पीटा था। शाम को पुलिस को जेएनयू में झगड़े की सूचना मिली थी।
