नई दिल्ली : हरियाणा की मनोहरलाल सरकार ने राज्य के बिल्डरों को झटका दिया है। सरकार ने श्रमिकों की भलाई के लिए लगने वाले श्रमिक उपकर में 40 फीसद की बढ़ोतरी कर दी है। अभी बिल्डर कंपनियों को निर्माण लागत का एक फीसद श्रमिक उपकर के रूप में देना होता था, लेकिन अब इसे बढ़ा कर 1.4 फीसद कर दिया गया है।

भवन निर्माण लागत पर उपकर एक से बढ़ाकर 1.4 फीसद किया गया
हरियाणा के श्रम विभाग ने 13 जनवरी 2021 को जारी नए आदेश में यह वृद्धि की है। श्रम विभाग के आदेश में कहा गया है कि अब श्रमिक उपकर (Labor Cess) के रूप में निर्माण लागत का 1.4 फीसद देना होगा। श्रमिक उपकर से राज्य श्रम विभाग में 250 करोड़ रुपये जमा हैं मगर इन्हें श्रमिकों के हित में खर्च करने की बजाये राज्य सरकार ने उपकर में बढ़ोतरी की है।
-कोरोना काल में स्वयंसेवी संस्थाओं पर ही निर्भर रहे निर्माण श्रमिक
– श्रमिक की तीन लड़कियों की शादी में शादी से तीन दिन पूर्व 50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।
– श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के लिए 8 हजार रुपये से लेकर 20 हजार रुपये सालाना तक अनुदान दिया जाता है।
– कामगारों के मेधावी बच्चों के लिए 21 हजार से 91 हजार रुपये तक की छात्रवृत्ति दी जाती है।
– मातृत्व-पितृत्व लाभ के अलावा प्रति पांच वर्ष में औजार खरीदने को आठ हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है।
– श्रमिक को साइकिल और श्रमिक की पत्नी या बेटी को सिलाई मशीन भी दी जाती है।
