वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शताब्दी वर्ष के दूसरे दिन की शाम कवियों के नाम रहा। परिसर स्थित गांधी अध्ययनपीठ सभागार में गुरुवार को आयोजित काव्य गोष्ठी में हास्य व्यंग्य की फुहार और विचार की धार बही। कवि सम्मेलन की शुरूआत कानपुर के हेमेंत पांडेय की कविताओं से हुई। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से हास्य व्यंग्य की फुहार से राजनीति के जटिल मुद्दों को शब्दबद्ध किया। लखनऊ से आए अभय सिंह निर्भीक ने अपनी कविताओं में विरताबोध के भाव को प्रकट किया। जबलपुर की मनिका दुबे ने राम पर लिखी कविता का पाठ किया। उन्होंने जब अपनी प्रेम कविताओं को गाकर पाठ किया तब उनका साथ ताली बजाकर सभागर में उपस्थित श्रोताओं ने दिया। कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसमें एक से बढ़कर एक रचनाओं का पाठ किया गया। डा. अनिल चौबे, डा. कुमार विमलेंदु सिंह, नुसरत अतीक, डा. कलाम कैसर ने भी अपनी एक से बढ़कर एक कविता पाठ कर लोगों को खूब गुदगुदाया। इस मौके कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने चंद्रकांता धारावाहिक के क्रूर सिंह नाम से मशहूर हुए अखिलेन्द्र मिश्र की काव्य संग्रह ‘आलिामृतम का विमोचन किया। वहीं क्रूर सिंह ने भोजपुरी कविता हमार माई का पाठ कर पूरा माहौल भोजपुरीमय हो गया। कवियों का परिचय प्रो. अनुराग कुमार, स्वागत प्रो. निरंजन सहाय, संचालन डा. शशिकान्त यादव तथा ने किया। समारोह में छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डा. बंशीधर पांडेय, डा. सुमन ओझा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
उत्पादक कार्यों में निवेश से ही आात्मनिर्भर होगा भारत : शाहीकृषि शिक्षा व अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रतिवर्ष दलहन और तिलहन के आयात पर 75 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसे रोका जा सकता है। आत्मनिर्भर भारत के लिए उत्पादक कार्यों में भी निवेश बेहद जरूरी है। वह गुरुवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत बलवंत सिंह इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नोलाजी (भैरव तालाब परिसर) में तकनीकी खंड का लोकार्पण करने के बाद बोल रहे थे। कहा कि ड्राप मोर क्राप (हर बंूद से ज्यादा उपज) काफी महत्वपूर्ण योजना है। इस तकनीक से न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि उर्वरक लागत भी कम होती है। ऐसे में किसानों की आमदनी बढ़ाने में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना कारगर है। कहा कि किसान फल व फूलों की खेती कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। किसानों व कृषि के छात्रों से नए कृषि कानून के आॢथक-सामाजिक सशक्तीकरण लाभ आमजन तक पहुंचाने का आह्वान किया। छात्रों से दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए देशज नस्ल के पशुओं पर शोध करने करने की अपील की। कृषि विकास के लिए नए प्रस्ताव प्रदेश सरकार को प्रेषित करने का सुझाव भी दिया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि सीमित संसाधनों व प्रतिकूल परिस्थितियों के बाद भी विश्वविद्यालय क्षेत्रीय विकास के लिए दृढ़ संकल्पित है।
राष्ट्रीय विचारधारा की पोषक है नई शिक्षा नीति : कलराज मिश्र
राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि ब्रिटिश शासन काल में पाश्चात्य शिक्षा का बोलबाला था। देश के युवा दिगभ्रमित हो रहे थे। स्वतंत्र राष्ट्रीय नीति व जीवन मूल्यों की स्थापना के लिए वर्ष 1921 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की स्थापना की गई। वहीं नई शिक्षा नीति भी राष्ट्रीयता, संस्कार व जीवन मूल्यों से ओतप्रोत है। आधुनिक सोच समाहित है। कुल मिलाकर नई शिक्षा नीति राष्ट्रीय विचारधारा की पोषक है। वह गुरुवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शताब्दी वर्ष समारोह के दूसरे दिन गुरुवार को बतौर मुख्य अतिथि आनलाइन संबोधित कर रहे थे। नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह जनआकांक्षाओं का मूर्तरूप है। शिक्षा वह है जो तकनीकी, मानसिक व बौद्धिक शक्तियों का विकास करे। कुछ इसी सोच के साथ देश में नई शिक्षा नीति लागू की गई है। जो युवाओं को नवोन्मेषी बनाने और उनमें राष्ट्रीय संस्कार जगाने वाली है। शिक्षा का उद्देश्य जड़ता दूर करना है।
