हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में प्रदेश के सभी कानून ‘हरियाणवी’ हो जाएंगे। इस सत्र में सरकार ऐसा विधेयक पास करवाने जा रही है, जिससे 163 कानूनों के नाम से ‘पंजाब’ शब्द हटा कर उसकी जगह पर ‘हरियाणा’ कर दिया जाएगा। हरियाणा के अधिनियमों से पंजाब का नाम हटाने के उद्देश्य से गठित कमेटी ने अपनी सिफारिशें पेश कर दी हैं। इन सिफारिशों को लेकर हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने विधानसभा सचिवालय में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव विजय वर्धन, विधानसभा सचिव राजेंद्र कुमार नांदल और कानून एवं विधि विभाग की लीगल रिमेम्ब्रेन्सर बिमलेश तंवर के साथ बैठक की है। बैठक में दोनों अधिकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष को बताया है कि इस मामले में गठित समिति अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव के सामने पेश कर चुके है। इसके बाद यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने पेश की गई।
अधिकारियों के मुताबिक इस रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री अपनी मंजूरी दे चुके हैं, जिसके बाद विधेयक का मसौदा तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है। अब प्रदेश सरकार का संसदीय कार्य विभाग इस रिपोर्ट के आधार पर विधेयक का मसौदा तैयार करेगा। विधानसभा अध्यक्ष के मुताबिक हरियाणा के कानूनों के शीर्षकों से ‘पंजाब’ शब्द हटाने के लिए विधेयक 5 मार्च से शुरू हो रहे विधान सभा के बजट सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। इस विधेयक के पास होने से करीब 163 कानूनों से पंजाब का नाम हट जाएगा। ज्ञान चंद गुप्ता ने बताया है कि इस मामले में गठित कमेटी की सिफारिशें सकारात्मक हैं और इससे विधेयकों के नाम हरियाणा के नाम पर करने का रास्ता साफ हो गया है।
आपको बता दें कि साल 1966 में पंजाब से अलग होकर हरियाणा का गठन किया गया था। उस समय पंजाब में जिन अधिनियमों का अस्तित्व था, वे उसी रूप में हरियाणा में लागू कर दिए गए थे। व्यवस्था यह बनी थी कि 1968 में हरियाणा अपनी जरूरतों के मुताबिक इनमें आवश्यक संशोधन कर सकेगा। अनावश्यक कानूनों को हटाने का अधिकार भी प्रदेश की विधानसभा को मिला। हरियाणा को विरासत में जो कानून मिले थे, वे सभी पंजाब के नाम पर थे और गत 54 वर्षों से हरियाणा की शासन व्यवस्था इन्हीं कानूनों के आधार पर चल रही है। वहीं अब 5 मार्च से शुरू होने जा रहे बजट सत्र में प्रदेश सरकार ऐसा विधेयक पास करवाने जा रही है, जिससे 163 कानूनों के नाम से ‘पंजाब’ शब्द हटाकर ‘हरियाणा’ जोड़ दिया जाएगा।
