1. दुनियाभर में हजारों-लाखों तरह की धारणाएं प्रचलित हैं। हालांकि इनके पीछे का सच कोई नहीं जानता है। ये वैज्ञानिक शोध का विषय हो सकती हैं या इन्हें अंधविश्वास मानकर खारिज किया जा सकता है। जरूरी नहीं है कि यह विचार सत्य ही हो। इनमें से कुछ समाज में प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है, कुछ वैज्ञानिक तथ्य हैं और कुछ सोशल मीडिया में प्रचलित। यहां सिर्फ जानकारी हेतु ही ऐसी बातों को खोजकर पाठकों के लिए प्रस्तुत किया गया है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
2. ऐसा माना जाता है कि यदि आपकी नाक आपको दिखाई देना बंद हो जाए तो समझिए कि मौत निकट ही है या आप किसी गंभीर बीमारी के शिकार हो गए हैं। यह मान्यता भी है कि सीधे खड़े होकर यदि आपको आपके घुटने दिखाई नहीं देते हैं तो आपका शरीर खतरनाक स्थिति में है।
3. ऐसी मान्यता है कि टिटहरी जिन दिन वृक्ष पर रहने लगे समझो कि धरती पर भूकंप आने वाला है। टिटहरी कभी भी वृक्ष पर अपना घर नहीं बनाती है। वह भूमि पर ही अंडे देती है और भूमि पर ही रहती है।
4.चाहे आप कितनी भी कसरत कर लें या पौष्टिक आहार खा लें, आंखों की रोशनी उम्र के साथ कमजोर होगी ही। जन्म के बाद से हमारे शरीर के अंग बड़े होने तक बढ़ते रहते हैं लेकिन आंखों का आकार एक जैसा ही रहता है। आखों की पलकें दिन में करीब 15,000 बार झपकती हैं। कहते हैं कि आंखें नहीं, दिमाग देखता है।
5.
कल्पना ज्ञान से महत्वपूर्ण होती है। आप जैसी कल्पना करते हैं, वैसे ही बनते जाते हैं या कि आपका भविष्य भी वैसा ही बनता जाता है। इस सत्य पर कई तरह के शोध हुए और यह 80 प्रतिशत सत्य पाया गया।
6. कोई भी उस व्यक्ति से प्रेम नहीं करता जिससे वह डरता है। धार्मिक किताबें अक्सर ईश्वर के प्रति लोगों में भय को बिठाने का ही कार्य करती हैं। सामाजिक बंधन भी भय के कारण ही है। तब यह वचन झूठा है कि ‘भय बिन होय न प्रीत गुसांई’
7. मूर्ख से विनय और हिंसक या क्रोधी से शांति की बात करना उसी तरह है जिस तरह कि बंजर भूमि में बीज बोना। शांति की बात भी वही लोग करते हैं, जो डरपोक या तथाकथित सहिष्णु होते हैं।
8. जिराफ घोड़ों से तेज भाग सकते हैं और ऊंट से ज्यादा दिनों तक पानी के बिना रह सकते हैं। इससे इस धारणा का खंडन होता है कि पशुओं में घोड़े सबसे तेज भागते हैं और ऊंट ज्यादा दिनों तक बिना पानी के रह सकते हैं।