देशभर में कोरोना महामारी के कहर को देखते हुए लॉकडाउन लगा दिया गया है। वहीं इस लॉकडाउन के चलते लोगों आर्थिक तौर से भी भारी प्रभाव पड़ा है। दरअसल, रेहड़ी, रिक्शा चालक, चाय का दुकान चलाकर और अन्य तरीकों से अपने परिवार का गुजर-बसर करने वाले गरीब लोगों के लिए लॉकडाउन में दो वक्त की रोटी जुटाना टेढ़ी खीर साबित हो रही है।
गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते 22 मार्च 2020 को भारत देश में पहली बार लॉकडाउन लगा था, जोकि कई महीनों तक चला था। जिससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। लोगों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। यहां तक की गरीबों को दो वक्त की रोटी तक के लाले पड़ गए थे। लेकिन कुछ समय बाद लॉकडाउन खुलने के बाद पिछले साल के अंत तक लोगों ने अपना काम-धंधा शुरू किया था और कुछ आर्थिक स्थिति सुधारने की कोशिश करने लगे थे। लेकिन अब फिर साल 2021 में एक बार दोबारा से कोरोना महामारी ने अपना विकराल रूप धारण कर लिया है। जिससे प्रदेश सरकार को मजबूरन दोबारा लॉकडाउन लगाना पड़ा।
चाय की दुकान चलाने वाले गांव दूल्हेडी निवासी सोनू सैनी ने कहा कि चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का पेट भरता था। पिछले साल भी लॉकडाउन ने काफी कर्ज करवा दिया। अब दोबारा से फिर लॉकडाउन के कारण दुकान बंद रहने से परिवार का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है।
