
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से ट्विन सिटी में हालात बुरी तरह बिगड़ गए हैं। एक ओर जहां शहर की आबोहवा खराब हो रही है, वहीं दूसरी ओर रात के अंधेरे में कचरे में आग लगा दी जा रही है। दो-चार नहीं बल्कि शहर में कई जगह कचरा जलता हुआ देखा जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ठोस कचरा जलने से डाई-आक्सिन गैस पर्यावरण में घुल जाती है जोकि सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाती है। जोकि मुख्य रूप से ब्लड व फेफड़ों के कैंसर का कारण बनती है। इसके अलावा पोली-एयरोमेटिक हाइड्रोकार्बन व अन्य जहरीली गैसें भी विभिन्न बीमारियों का कारण बनती हैं।
300 में से जलने वाला कचरा 70 टन
नगर निगम एरिया के 22 वार्डों में से हर दिन करीब 300 टन कचरा निकलता है। इसमें से करीब 70 टन कचरा जलने वाला होता है। इसमें प्लास्टिक व थर्माकोल की आइटम अधिक होती हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि 70 टन कचरा जलने से पर्यावरण में डाई-आक्सिन गैस का स्तर 750 पीपीएम तक पहुंच जाता है। यमुनानगर-जगाधरी जैसे औद्योगिक शहर में सामान्य तौर पर इसका स्तर 50 पीपीएम तक रहता है। इतना ही नहीं जलने के बाद यह पानी में मिलकर धरती में समा जाता है जिससे जल प्रदूषण होता है।
यहां-यहां जल रहा कचरा
उठान न होने के कारण शहर में दो-चार नहीं बल्कि दर्जनों जगह कचरा जल रहा है। कई जगह तो प्लास्टिक के डस्टबिन भी जल कर राख हो गए हैं। कचरे के इन ढेरों में रात के समय कोई आग लगा जाता है। पूरी रात यह कचरा सुलगता रहता है। शहर के हमीदा हेड, बस स्टैंड के पास, औद्योगिक क्षेत्र, वर्कशाप रोड, बिलासपुर रोड, सहारनपुर रोड सहित अन्य कई जगह इन दिनों कचरे को जलते हुए देखा जा सकता है। हमीदा हेड पर तो तमाम हदें पार हैं। यहां पड़े कचरे के ढेरों में शाम ढलते ही आग की लपटें उठनी शुरू हो जाती हैं। जबकि यहां पकड़े कचरे को लेकर पीटिशन कमेटी के सदस्य भी नाराजगी जता चुके हैं। गत माह कमेटी के सदस्यों ने क्षेत्र का दौरा कर जल्द कचरा उठान के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके इस दिशा में कोई सुधार नहीं हो पाया।
एक पीपीएम भी घातक
पर्यावरण विशेषज्ञ डा. अजय गुप्ता का कहना है कि ठोस कचरे का जलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसके जलने से डाई-आक्सिन गैस पर्यावरण में घुल जाती है। जोकि केंसर का कारण बनती है। शोध में यह प्रमाणित हो चुका है। यदि सांस के साथ एक पीपीएम भी शरीर में प्रवेश कर जाता है तो वह भी खतरनाक है। इसलिए शहर में कचरा बिल्कुल भी न जलाया जाए। चिंताजनक पहलु यह भी है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भी इस जहरील गैस काे रिकार्ड नहीं किया जाता। शहर में पड़े कचरे के उठान की तुरंत व्यवस्था की जानी चाहिए।
NEWS SOURCE : jagran
