प्राइवेट स्कूल संचालकों पर हरियाणा सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सरकार ने उन स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किए हैं, जो सरकार के आदेश के बावजूद वार्षिक शुल्क और बस किराया वसूल रहे हैं। इसके साथ ही जो स्कूल अभिभावकों के मोबाइल पर मैसेज भेज कर महंगी किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं उन पर भी कार्रवाई की गई है।
इसको लेकर सरकार ने स्पष्ट कहा है कि बगैर मंजूरी के एनसीईआरटी की किताबों से अलग पुस्तके लगाने वाले स्कूल संचालकों पर कार्रवाई होगी। इसके साथ ही स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इन स्कूलों पर भी कार्रवाई के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारियों को दिए हैं जो एक साथ 3 महीने की फीस और विभिन्न प्रकार के वार्षिक फंड मांग रहे हैं।
सरकार के पास निजी स्कूलों और अभिभावकों पर फीस वसूली और निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनाने की शिकायतें पहुंची हैं। छोटे ही नहीं कई शहरों के बड़े और नामचीन स्कूलों द्वारा भी मैसेज भेज कर पैसों की डिमांड की जा रही है। स्कूल संचालकों का तर्क है कि सरकार ने भले ही शुल्क लेने से शुल्क न लेने के निर्देश दिए हैं लेकिन स्कूलों के भी अपने खर्चे हैं।
वहीं हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा है कि लॉक डाउन के दौरान स्कूल बसों का किराया नहीं लेंगे अभिभावकों को सरकारी निर्देशानुसार एक 1 महीने की फीस जमा कराने में सहयोग करना चाहिए। ताकि स्टाफ को वेतन दिया जा सके अगर किसी अभिभावक को 1 महीने की फीस देने में भी दिक्कत है तो वह लिखित आग्रह दे सकता है ऐसे में कोई भी स्कूल संचालक उस पर फीस जमा कराने के लिए दबाव नहीं बनाएंगे।
