फरीदाबाद : लॉक डाउन के दौरान भारत में कई सामाजिक संस्थाओं ने इस विषम परिस्थिति में बढ़-चढ़कर सहयोग किया है ।इस समय जब देश एक असाधारण संकट से गुजर रहा है तो देश की कई सामाजिक संस्थाएं भी सहयोग करने के लिए कमर कस चुकी हैं। सरकार और प्रशासन अपने अपने तरीके से कोरोनावायरस को निपटने और देश की जनता को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
सामाजिक संस्थाओं का दृष्टिकोण पूर्णतया मानवीय है ।सेवा भाव को ही परम कर्तव्य मान सामाजिक संस्थाएं गरीबों की बुनियादी जरूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं ,एवं पूरी तरह सक्रिय हैं। उनका समर्पण व प्रतिबद्धता सराहनीय है ।यह संस्थाएं व सामाजिक संगठन अंधविश्वास दूर करने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।अशिक्षितों को सामाजिक दूरी के मायने भी समझा रहे हैं ।
विभिन्न सामाजिक संस्थाएं रास्ते में फंसे हुए यात्री ,आसपास के कारखाने वाले मजदूरों को गरीब रिक्शा वालों को खाने के पैकेट बाँट रहे हैं । गरीबों को खाना खिला कर हैं ।कई संस्थान राशन वितरण किया है ,अलग-अलग झुग्गी झोपड़ियो मे राशन बांट रहे हैं। कुछ सामाजिक संस्थाएं दोनों टाइम का खाना वितरित करती हैं। खाने में मिक्स सब्जी ,सोयाबीन, दाल, रोटी, चावल आदि शामिल होता है लॉक डाउन होने से प्रवासी मजदूर ,रिक्शावाले ,रोज कमाने वालों के सामने समस्या का पहाड़ टूट पड़ा है ।उनके लिए खाद एवं सुरक्षा का संकट खड़ा हो गया है ऐसे में कुछ संस्थाएं उनको खाद्य सामग्री ,राशन के साथ साथ घर के बने साथ ही एवं सैनिटाइजर भी बांट रहे हैं । कुछ सामाजिक संस्थाएं बच्चों को कापी किताबें भी बांट रही है ताकि गरीब बच्चो की पढ़ाई भी जारी रहे ।यह पुनीत कार्य है ,और देश के हर नागरिक का कर्तव्य है कि यथासंभव इस समय वह आपातकाल की स्थिति में देश की मदद करें ।इस समय गरीब लाचारों की कुछ न कुछ सहायता हम सबको अवश्य करनी चाहिए क्योंकि मानव सेवा से बढ़कर न कोई सेवा है न कोई धर्म है ।
कुंवर संदीप रावत समाजसेवी • लेख
