
इंसान के पास जैसे-जैसे पैसे आ रहे हैं, उसे सुविधाओं की लत लगती जा रही है. हर कुछ उसे बेड पर चाहिए. कहीं जाना नहीं चाहता. सिर्फ आराम करने की ख्वाहिश है. तमाम लोग इन ख्वाहिशों की वजह से परेशान भी हो जाते हैं, क्योंकि महंगाई उनका रास्ता रोक लेती है. वे इतना पैसा नहीं कमा पाते कि अपनी इच्छाएं पूरी कर लें. ऐसे लोगों के लिए मार्गरेट गैलाघेर एक मिसाल हैं. वह 80 साल से बिना बिजली और पानी के रह रही हैं. झोंपड़ी को ठिकाना बना रखा है. खर्च एक पैसे का भी नहीं. कहती हैं, प्रकृति के पास सबकुछ आपको देने के लिए है. बस आपको लेने आना चाहिए l
मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्गरेट गैलाघेर 80 वर्षों से ऑफ-ग्रिड रह रही हैं. 1942 में उनका जन्म आयरलैंड में हुआ. लेकिन 10 साल की उम्र में ही उनकी मां की मृत्यु हो गई. पिता का स्वास्थ्य खराब रहता था. इसी वजह से जब पूरा आयरलैंड बिजली-पानी के अत्याधुनिक तौर तरीके अपना रहा था, तब उन्हें यह मौका नहीं मिला. बाद में पिता की मौत हो गई तो उन्हें इन चीजों से नफरत हो गई. तब से मार्गरेट ऑफ-ग्रिड जीवन जी रही हैं. वह कहती हैं, मैं इसलिए ये कर रही हूं क्योंकि मुझे ये करना पसंद है. मुझे लगता है कि यह नया और फैशनेबल है l
घर में दो छोटे बेडरूम
गैलाघेर को दिन में 10 बार कुएं से बाल्टी में पानी इकट्ठा करने के लिए एक खेत पार करना पड़ता है. खाना पकाने के लिए उनके पास गैस जैसी कोई चीज नहीं, इसलिए रोज सुबह वह कूड़े के ढेर जलाती हैं. वह सुबह 05:30 बजे उठती हैं. कपड़े धोने के लिए केतली में आग पर पानी गर्म करती हैं. रेडियो पर समाचार सुनती हैं. उनके घर में दो छोटे बेडरूम है, जिसमें लाइट के लिए लैंप जलता है. इसके अलावा उनके पास बिजली का कोई उपकरण नहीं l
वैसे ही जी रही हूं जैसे मेरे पूर्वज रहते थे
उसे गर्मी पसंद है और सर्दियों में उसकी रुचि कम होती है. सर्दी के दिनों में छप्पर पर बर्फ जमा हो जाती है, तो हटाने के लिए मछली पकड़ने वाले लंबे डंडे का उपयोग करती हैं. उनके घर में सेंट्रल हीटिंग जैसी कोई चीज नहीं. मार्गरेट ने कहा, यह लो कॉस्ट लाइफ है. एक पैसा खर्च नहीं होना. आपके घर में सुबह-सुबह घोंसले बनाने वाले पक्षी हैं. खूबसूरत नजारे हैं.आपके पास टिक-टिक करती घड़ी है और वे सभी चीजें हैं, जिनकी आप कीमत नहीं लगा सकते. मैं वैसे ही जी रही हूं जैसे मेरे पूर्वज रहते थे l
