
भिवानी: भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार लोकसभा चुनाव-2024 में मतदाताओं को अपनी ओर रिझाने के लिए कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार अपने चुनाव प्रचार-प्रसार में किसी भी नाबालिग बच्चे का इस्तेमाल नहीं कर सकता। सभी राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों को बाल श्रम (निषेध और विनियमन) द्वारा संशोधित बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 का कड़ाई से अनुपालना करनी होगी।
चुनाव आयोग करेगा सख्त कार्रवाई
आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में जाएगी। इस संबंध में निर्वाचन आयोग ने निर्देश जारी किए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी नरेश नरवाल ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने किसी भी चुनाव-संबंधी गतिविधियों में बच्चों के इस्तेमाल के संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी रूप में चुनाव अभियानों में नाबालिग बच्चों का उपयोग न करें, जिसमें पोस्टर/पंपलेट का वितरण के अलावा नारेबाजी, रैलियां, चुनावी बैठकें शामिल हैं।
नाबालिगों के लिए दिया शून्य सहनशीलता का संदेश
निर्वाचन आयोग ने बच्चों के उपयोग के प्रति शून्य सहनशीलता का संदेश दिया है। इनमें चुनाव संबंधी गतिविधियों में नाबालिग बच्चों की भागीदारी पर प्रतिबंध लगाया है। राजनीतिक दलों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों को किसी भी प्रकार के चुनाव अभियान में शामिल न करें। राजनीतिक नेताओं और उम्मीदवारों को किसी भी तरह से प्रचार गतिविधियों के लिए बच्चों का उपयोग नहीं करना चाहिए, जिसमें प्रचार-प्रसार के दौरान बच्चे को गोद में लेना, वाहन में बच्चे को ले जाना या रैलियों में शामिल करना शामिल है। चुनाव प्रचार प्रक्रिया में वोट हासिल करने के लिए नाबालिग बच्चों से कविता, गीत, बोले गए शब्दों के माध्यम से उपयोग करना व प्रतीक चिह्न भी निषेध है।
NEWS SOURCE : jagran
