फरीदाबाद : अपने लिये हर कोई जीता हैं,कभी दूसरों के लिये भी जी कर दिखाओ । यदि किसी को जीवनदान नही दे सकते हो तो किसी का जीवन छीनने का भी आपको अधिकार नही हैं । ये सभी बातें केवल आदर्श वाक्य ही नही अपितु हमारी सनातन भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं।हमारे धर्मशास्त्रों के अनुसार कहा जाता हैं कि 84 लाख योनियों के बाद जाकर मानव का जीवन प्राप्त होता हैं। मानव जिसे सभी प्राणियों में श्रेष्ठ कहा गया हैं क्योंकि उसके पास बुद्धि हैं,सोच-विचार करने की वह शक्ति हैं जिससे उसे अच्छे-बुरे, लाभ-हानि, पाप-पुण्य, शत्रु-मित्र आदि की समझ होती है। हम भी उस मानव समाज का हिस्सा हैं। मानव समाज का अभिन्न अंग होने के कारण घर-परिवार,समाज की जिम्मेदारियों का बोझ तो होता ही हैं।इसके इतर एक और नैतिक बोझ होता है वो है प्राणिमात्र की सेवा ।
इस भौतिकतावादी, विलासितापूर्ण जीवन जीने की चाह में मानव दिन-रात बस पूँजी जमा करने की जुगत में लगा हुआ हैं। इन सबके बीच आपने कुछ ऐसे मानवों को भी साक्षात ईश्वर के रूप में देखा होगा जो सुबह होते ही कबूतरों,चिड़ियाओं को चुग्गा डालते ,चींटियों को अनाज डालते,बेसहारा कुत्तों को रोटी डालते,गायों को हरा चारा डालते ,बेजुबान पशु-पक्षियों के लिये पानी की व्यवस्था करते,उनके लिये परिंडे लगाते हुए इत्यादि। सच में ये मानव के रूप में फरिश्ता हैं क्योंकि इनके दिल में प्राणिमात्र के प्रति करुणा,प्यार और सेवा का भाव हैं इन बेजुबान,बेसहारा जीव जंतुओं के लिये।
वर्तमान में कोरोना ने हाहाकार मचाया तो इससे न केवल मानव अपितु ये बेजुबान पशु-पक्षी, जीव-जंतु भी व्यापक रूप से प्रभावित हुए हैं । एक अनजाने भय से मानव पिंजरे में कैद हो गया और जो पिंजरे में कैद थे वे आजाद हो गए । कोरोना संक्रमण के भय से गाँव-शहर की गलियां सूनी हो गई तो ये बेजुबान पशु-पक्षी भी दाना-पानी के लिये भटकते नजर आए । सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो के दृश्यों को देखकर इनकी पीड़ा को साफ देखा जा सकता हैं।हमारी सनातन भारतीय संस्कृति की यह परम्परा रही हैं कि खाना बनाते समय पहली रोटी गाय एवं कुत्ते के लिये अलग रखी जाती हैं।जब खाना खाते है तब भी खाने का कुछ भाग कुत्ते को डालते है। छोटी से छोटी चींटी से लेकर हर जीव जंतु,पेड़-पौधों इत्यादि के संरक्षण को लेकर हमारे शास्त्रों में बहुत कुछ लिखा गया हैं ।
इतिहास की बात करे तो हम सदा ही उन आदर्श पुरुषों का अनुसरण करते है जिन्होंने इस समाज,धर्म,राष्ट्र एवं प्राणी मात्र के प्रति अपना धर्म निभाया हैं।हमेशा जो अच्छे कर्म करता हैं उसे सदियों तक याद रखा जाता हैं। हम भी मानव जीवन के रूप में आए है तो हमारा भी फर्ज़ हैं कि इंसानियत धर्म का फर्ज़ अदा करें।सच में मनुष्य वही है जो अपने आस-पास दुःख देखे तो व्यथित हो जाए और सुख देखे तो प्रफुल्लित हो जाए।हमारी संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की रही हैं।जब हम सारे विश्व को ही एक परिवार मानते है तो उसका आशय है इस विश्व में स्थित समस्त सजीव एवं निर्जीव पदार्थ हमारे परिवार का हिस्सा हैं । हमे बिना किसी धर्म ,रंग,रूप जाति का भेद किये मानवता के नाते सभी प्राणिमात्र की सहायता करनी चाहिये ।
अब गर्मी का दौर शुरू हो गया हैं। प्रचण्ड गर्मी, लूं एवं आँधियों के बीच इन पशु-पक्षियों के लिये मुसीबत का समय शुरू हो गया हैं।कुछ वन्यजीवप्रेमियों,समाजसेवियों,संस्थाओं इत्यादि ने पहल करते हुए परिण्डे लगाओ अभियान शुरू किया हैं ।इस अभियान को सफल बनाने के लिये व्यापक स्तर पर जागरूकता लाने के लिये समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया का अहम योगदान हैं।हमे भी इस मुहिम का हिस्सा बनकर प्राणिमात्र की सेवा अवश्य करनी चाहिये।
